
जबलपुर। पूरे संभाग में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल शुरू होने के साथ ही फोर-व्हीलर लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया बेहद कड़ी होने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इस नई व्यवस्था के अंतर्गत ड्राइविंग टेस्ट को कुल 100 अंकों का कर दिया गया है। सामान्य निजी फोर-व्हीलर लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदकों को न्यूनतम 60 नंबर लाना अनिवार्य होगा, अन्यथा एक भी नंबर कम रहने पर आवेदक को फेल कर नया स्लॉट बुक करना पड़ेगा। वहीं, व्यावसायिक यानी कमर्शियल लाइसेंस के लिए प्रक्रिया को और भी कठिन करते हुए पूरे 100 में से 100 अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है। डिजिटल डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सेंसर और अत्याधुनिक कैमरों से लैस ऑटोमैटिक ट्रैक का उपयोग किया जाएगा।
सेंसर ट्रैक और सॉफ्टवेयर का प्रयोग
परिवहन विभाग की इस नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर केवल प्रशिक्षित चालकों को ही वाहन चलाने की अनुमति देना है, जिससे सड़क हादसों में कमी लाई जा सके। ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के इस आधुनिक ट्रैक पर टेस्ट के दौरान आवेदक द्वारा की जाने वाली हर छोटी-बड़ी चूक को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर स्वत: ही रिकॉर्ड कर लेगा। टेस्ट के दौरान यदि कोई आवेदक लाइन तोड़ता है, ट्रेफिक सिग्नल का उल्लंघन करता है या गाड़ी पर से नियंत्रण खो देता है, तो सिस्टम तुरंत उसके नंबर काट देगा। इस शत-प्रतिशत डिजिटल निगरानी से मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) जबलपुर में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या वीआईपी सिफारिश के दम पर लाइसेंस बनवाने के खेल पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
क्या है अंकों का नया फार्मूला
नए नियमों के तहत 100 अंकों के इस पूरे टेस्ट को अलग-अलग तकनीकी चरणों में विभाजित किया गया है। इसमें आवेदक की दक्षता जांचने के लिए पैरेलल पार्किंग के लिए 25 अंक, जंक्शन पर वाहन के सही संचालन के लिए 25 अंक, अंग्रेजी के आठ यानी 8 नंबर के आकार वाले ट्रैक पर गाड़ी घुमाने के लिए 20 अंक और पैदल यात्री?िंग (जेब्रा क्रॉसिंग) के नियमों का पालन करने के लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा वाहन को पूरी तरह नियंत्रित रखने और सिग्नलों के सही पालन के लिए भी अलग से अंक दिए जाएंगे।
बसों और टैक्सियों में पैनिक बटन को लेकर सख्ती
इस नई व्यवस्था के साथ ही परिवहन विभाग सुरक्षा मानकों को लेकर भी बेहद गंभीर रुख अपना रहा है। संस्कारधानी जबलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली लगभग 70 फीसदी बसों और टैक्सियों में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (वीएलटी) डिवाइस बंद मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। वाहन संचालक फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने के तुरंत बाद गाडिय़ों से इन सुरक्षा उपकरणों को हटा देते हैं। विभाग अब ऐसे वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है ताकि यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
निर्देशों का सख्ती पालन होगा
इस संबंध में मध्य प्रदेश शासन द्वारा जो भी निर्देश जारी किया जाएंगे, उनका सख्ती से पालन कराया जाएगा। सड़कों पर प्रशिक्षित ड्राइवर अगर वाहन चलाएंगे तो नि:संदेह दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
श्रीमती रिंकू शर्मा, आरटीओ, जबलपुर
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