
नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान (Iran) और अमेरिका (US) के बीच भड़का युद्ध अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. फारस की खाड़ी (Persian Gulf) तक सीमित यह जंग अब भूमध्य सागर और मिस्र (Egypt) के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों तक फैलती दिख रही है. बुधवार को मिस्र के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण डामिएत्ता पोर्ट पर खड़े एक अमेरिकी गैस टैंकर (Gas tanker) पर ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद वहां भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई.
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म ‘एम्ब्रे’ के मुताबिक, हमला अमेरिका के ‘एनर्जोस विंटर’ नामक फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर पर हुआ. विस्फोट इतना जोरदार था कि आग पास में खड़े एक अन्य LNG वाहक ‘गैसलाग सेलम’ और एक टगबोट तक फैल गई. दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और जहाजों से नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर कड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा और अब ईरान पर हमला करने की हमारी बारी है.
मिस्र के पोर्ट पर हुए धमाके की जानकारी मिलने की बात कहते हुए ट्रंप ने कहा, ‘वे जानते हैं कि यह आने वाला है.’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अभी बनी हुई है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दोहराई.
ट्रंप ने रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान पर भी टैरिफ लगाने की वकालत की और कहा कि इससे कानून “काफी मजबूत” होगा. उन्होंने कहा, ‘मैं ईरान पर टैरिफ लगते देखना चाहता हूं. इससे यह कानून काफी मजबूत हो जाएगा.’
मिस्र ने मानी आग की बात, हमले पर साधी चुप्पी
मिस्र के पेट्रोलियम मंत्री करीम बदावी स्थिति का जायजा लेने खुद डामिएत्ता पोर्ट पहुंचे. मिस्र के पेट्रोलियम और खनिज संसाधन मंत्रालय ने आपातकालीन टीमों द्वारा आग पर काबू पाने की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने इस बात का कोई जिक्र नहीं किया कि यह हादसा ड्रोन हमले के चलते हुआ. हालांकि, किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन मिस्र जैसे शांत देश में ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है.
🚨🇺🇸🇪🇬🇲🇭 A US-owned LNG floating storage facility flying a Marshall Islands flag was struck by at least one drone in Damietta, Egypt.
Local authorities say the situation is now ‘under control.'
“The vessels involved have been safely relocated outside the port area… port… pic.twitter.com/te6MxlOtDp
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) July 29, 2026
कितना महत्वपूर्ण है एनरगोस विंटर?
जिस जहाज को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है, वह एक सामान्य गैस टैंकर नहीं है. एनरगोस विंटर एक फ्लोटिंग स्टोरेज एंड रिगैसिफिकेशन यूनिट (FSRU) है, जिसकी LNG भंडारण क्षमता करीब 1,38,250 घन मीटर है. यह LNG को दोबारा प्राकृतिक गैस में बदलकर घरेलू पाइपलाइन या निर्यात नेटवर्क में भेजने में सक्षम है. यह जहाज अमेरिकी कंपनी एनरगोस इंफ्रास्ट्रक्चर के स्वामित्व में है, जबकि इसका तकनीकी, सुरक्षा और वाणिज्यिक संचालन विल्हेल्मसन शिप मैनेजमेंट द्वारा किया जाता है.
ईरान युद्ध की आंच मिस्र तक पहुंची?
दमिएत्ता पोर्ट पर यह घटना ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है. इससे कुछ घंटे पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे. इसे संघर्ष में एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है. इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया. ईरान ने भी दावा किया कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया. तेहरान ने रणनीतिक जलमार्ग के संयुक्त प्रशासन के ओमान के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है.
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी. फॉक्स न्यूज के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि हम उन पर जोरदार हमला करेंगे. यह बयान ट्रंप की ओर से अमेरिकी हवाई हमले अचानक रोकने के कुछ ही दिनों बाद आया है. उस समय उन्होंने कहा था कि सैन्य कमांडरों का मानना है कि अभियान का शुरुआती चरण अपने लक्ष्य हासिल कर चुका है. हालांकि, ताजा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि संघर्ष फिर तेज हो गया है.
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