नई दिल्ली। गुजरात के भरूच स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद (Jama Masjid) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक संगठन ने मस्जिद परिसर के भीतर हिंदू और जैन परंपरा से जुड़ी मूर्तियों और अवशेषों के मौजूद होने का दावा किया है। इस दावे के बाद शहर में तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
मामला तब चर्चा में आया जब “श्री चक्रधर स्वामी जन्म स्थल राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति” नामक संगठन ने दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित भरूच की जामा मस्जिद में हिंदू और जैन धर्म से जुड़े अवशेष मौजूद हैं। संगठन का कहना है कि इन अवशेषों के संरक्षण और उचित रखरखाव की जरूरत है।
संगठन ने 15 जून को एक सभा आयोजित करने की घोषणा की है। दावा किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। सभा के बाद कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचकर स्मारक में मौजूद कथित मूर्तियों और अवशेषों के संरक्षण की मांग उठाई जाएगी।
प्रशासन ने संभावित भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए मस्जिद परिसर समेत शहर के कई हिस्सों में निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अभियान से जुड़े स्वामी मुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उनके पास एक वीडियो मौजूद है, जो कथित तौर पर ASI अधिकारियों की मौजूदगी में रिकॉर्ड किया गया था। उनका दावा है कि वीडियो में स्मारक के निचले हिस्से में प्राचीन मूर्तियां खराब हालत में दिखाई देती हैं।
संगठन का यह भी कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक गतिविधि में बाधा डालना नहीं है और न ही मस्जिद में नमाज को लेकर कोई आपत्ति है। उनकी मांग सिर्फ यह है कि यदि ऐसे अवशेष मौजूद हैं तो उन्हें संरक्षित किया जाए।
जामा मस्जिद ट्रस्ट से जुड़े अब्दुल कामथी ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्मारक ASI के संरक्षण में है और प्रतिबंधित हिस्सों में बिना अनुमति किसी को प्रवेश की इजाजत नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि ASI अधिकारियों ने भी किसी तरह की वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति दिए जाने से इनकार किया है।
ट्रस्टी का कहना है कि यहां सैकड़ों वर्षों से नमाज अदा की जा रही है और विभिन्न समुदायों के लोग भी इस स्थल पर आते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व क्षेत्र की शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। मस्जिद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
फिलहाल, मूर्तियों और अवशेषों से जुड़े दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में प्रशासन स्थिति को कानून-व्यवस्था के नजरिए से संभालने में जुटा हुआ है।
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