इंदौर

8 से ज्यादा गांवों में स्कीम पर किसानों की नाराजगी, बोले-नहीं देंगे जमीन

 


करोड़ों की जमीन आधी करने पर तुला प्राधिकरण
आईडीए पांच हजार एकड़ जमीन के लिए लैंड पूलिंग एक्ट कर रहा लागू
इन्दौर।  कोरोना संक्रमण (Corona Transition) के भीषण दौर में इंदौर विकास प्राधिकरण (Indore Development Authority) ने विभिन्न योजनाओं के लिए पांच हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए योजना बनाई है। इसमें तकरीबन आठ से ज्यादा गांव आएंगे। लैंड पूलिंग एक्ट ( Land Pooling Act) के तहत होने वाली कार्रवाई पर किसानों ने स्कीम का नाम सुनते ही अपनी ओर से नाराजगी जाहिर कर दी है और कह रहे हैं कि सरकार का यह फैसला किसानों को नुकसान देने वाला है।
इंदौर शहर (Indore City) से लगे पूर्वी क्षेत्र के कनाडिय़ा, लसूडिय़ा मोरी, तलावलीचांदा, भौंरासला, शक्करखेड़ी, कुमेड़ी, अरण्डिया आदि गांवों (Villages)की जमीन को आईडीए विभिन्न स्कीम में रखना चाहता है। इसके लिए प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन इस बात की भनक जैसे ही किसानों (Farmers) को लगी तो वे आईडीए एवं सरकार से नाराज दिख रहे हैं। किसान सेना के अध्यक्ष केदार पटेल, दिलीपसिंह पंवार लसूडिय़ा ने बताया कि देशभर में जमीन अधिग्रहण के लिए 2013 में अधिग्रहण कानून बना था, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना और शहरी क्षेत्रों में दो गुना मुआवजे की बात कही थी, लेकिन इस बार आईडीए (IDA) की ओर से जो जमीन अधिग्रहण पूर्वी क्षेत्र के गांवों में किया जा रहा है, उसमें पुराने लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों को मुआवजा दिया जाना दर्शाया जा रहा है, जो कि कानून को तोड़-मरोडक़र पेश करने जैसा है, जिससे किसानों का नुकसान होगा। किसानों का कहना है कि आईडीए उनसे जमीन लेता है तो तुरंत मुआवजा भी दे। पहले भी कई बार पुराने कानून के अनुसार जमीनों का अधिग्रहण किया गया और वर्षों तक किसान अपने पैसों का इंतजार करते रहे, मगर जब उनके हाथ में पैसा आया तो जमीनों के भाव कई गुना बढ़ गए थे।

विपत्ति में बुला रहे हैं आपत्ति
प्राधिकरण की संवेदना इतनी मर गई है कि जब लोगों का घर से बाहर निकलना वर्जित है… पूरा शहर महामारी की चपेट में है… हर घर में से कोई न कोई बीमार निकल रहा है… अस्पताल भरे हुए हैं, ऐसे समय में प्राधिकरण ने न केवल किसानों की भूमियों पर स्कीम लगा दी, बल्कि इस विपत्ति में भी उन्हें आपत्ति दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है…प्राधिकरण के लिए यदि स्कीम लगाया जाना आवश्यक भी था तो कम से कम कोरोना काल के मद्देनजर आपत्ति का समय बढ़ाया जा सकता था… लेकिन जब शहर के कई लोग अपने जीवन के संघर्ष में लगे हैं तब एक माह में ही आपत्ति बुलाकर प्राधिकरण लोगों की विपत्ति बढ़ा रहा है।

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