
इंदौर सहित प्रदेशभर के राजस्व रिकॉर्ड की स्कैनिंग जारी, डेढ़ करोड़ से अधिक दस्तावेज हुए, भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से रियल टाइम ऑनलाइन होगी जमीनी जानकारी
– सीमाओं के भी डिजिटल मैप हो रहे हैं तैयार
– भू-अभिलेखों को आधार नम्बर से जोडऩे की भी होगी कवायद
– खसरा-खतौनी के रिकॉर्ड अभी ऑनलाइन उपलब्ध
– 50 लाख से ज्यादा पुरानी रजिस्ट्रियों को भी कर रहे हैं डिजिटल
– एमपी फॉर्म लैंड रिकॉर्ड से किसानों को भी मदद
– इंदौर निगम भी अपनी सम्पत्तियों का करवा रहा है भौतिक सत्यापन
– सम्पदा-2.0 पोर्टल के माध्यम से सभी नई रजिस्ट्रियां भी ऑनलाइन उपलब्ध
इंदौर। राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) के साथ प्रदेश की अंतरराज्यीय सीमाओं का भी डिजिटलीकरण (Digitalization) किया जा रहा है, ताकि विवाद तकनीकी आधार पर सुलझ सकें। इंदौर सहित प्रदेश का समूचा भूमि प्रबंधन अब ऑनलाइन (Online) उपलब्ध होगा और मोबाइल पर ही डिजिटल नक्शा भी प्राप्त हो जाएगा। भूमि अभिलेखों को आधार नम्बर से जोडऩे की कवायद भी की जा रही है और सभी राजस्व न्यायालयों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से लिंक कर दिया जाएगा। अभी हालांकि पोर्टल के माध्यम से खसरा-खतौनी के रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो रहे हैं। दूसरी तरफ 15 करोड़ से अधिक भू-अभिलेख को डिजिटल भी किया जा रहा है और डेढ़ करोड़ से अधिक दस्तावेजों की स्कैनिंग भी हो चुकी है। इंदौर नगर निगम से लेकर प्राधिकरण सहित कलेक्टर कार्यालय में भी अपनी सम्पत्तियों, जमीनों के रिकॉर्ड की स्कैनिंग करने के साथ उनके डिजिटल नक्शे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि रिकॉर्ड गायब होने अथवा जलने से लेकर अन्य गड़बडिय़ां रुकें और जमीनी धोखाधड़ी में भी कमी आ सके।
इन दिनों सम्पदा-2.0 पोर्टल के माध्यम से अचल सम्पत्तियों के दस्तावेजों का पंजीयन और रजिस्ट्री हो रही है, जिसके चलते रजिस्ट्री करवाते ही तुरंत उसकी पीडीएफ कॉपी व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए मिल जाती है और ऑनलाइन यह रिकॉर्ड पंजीयन विभाग के पास दर्ज हो जाता है। अभी चरणबद्ध तरीके से पंजीयन विभाग भी रजिस्ट्रियों को डिजिटल कर रहा है और अभी 2000 से लेकर 2015 तक की रजिस्ट्रियां ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है, तो पुरानी रजिस्ट्रियों को भी स्कैन किया जा रहा है। लगभग 50 लाख से अधिक मैन्युअल रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों को डिजिटल कर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया जाएगा, ताकि एक ही जमीन की फर्जीवाड़े से रजिस्ट्रियां, धोखाधड़ी सहित अन्य गड़बडिय़ां भी रुक सकेंगी। राजस्व विभाग का कहना है कि भूमि रिकॉर्ड का पूरा लेखा-जोखा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का लगभग 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है, जिसके चलते जनता को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी रियल टाइम ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। सीमांकन के कारण भी विवाद लम्बित रहते हैं, जो अब डिजिटल मैप तैयार होने के चलते आसानी से सुलझाए जा सकेंगे। हालांकि यह योजना केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत ही शुरू की गई और इसमें कुछ समय लगा, जिसके चलते इसकी अवधि बढ़ाकर 2026 तक करना पड़ी। रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्डों का एकीकरण, डिजिटली सीमांकन, तहसील स्तर पर आधुनिक कक्ष भी तैयार किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में राजस्व न्यायालयों में सुनवाई की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा सकेगी। अभी कलेक्टर से लेकर संबंधित एसडीएम द्वारा राजस्व कोर्ट में प्रकरणों की सुनवाई की जाती है और उसमें काफी समय भी लगता है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के साथ भविष्य में सुनवाई की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा सकेगी। एमपी लैंड रिकॉर्ड को डिजिटल करने पर 150 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जा रही है। इससे किसानों को भी फायदा होगा और उनकी जमीनों का डेटा बेस भी तैयार हो जाएगा।
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