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राम मंदिर चढ़ावा मामले में नया मोड़, संतोष दुबे ने एसआईटी को सौंपे 75 पन्नों के दस्तावेज; चंपत राय पर लगाए गंभीर आरोप

July 14, 2026

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा (Ram Mandir Offerings) और ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच तेज होती दिखाई दे रही है। धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने विशेष जांच दल (SIT) को 75 से अधिक पन्नों के दस्तावेज और कथित साक्ष्य सौंपे हैं। ये दस्तावेज सीओ सिटी श्रेयस त्रिपाठी (CO City Shreyas Tripathi) के माध्यम से एसआईटी तक पहुंचाए गए। इससे पहले एसआईटी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संतोष दुबे से बातचीत कर सोमवार दोपहर तक उपलब्ध साक्ष्य जमा कराने को कहा था।

दुबे का कहना है कि उन्होंने जांच एजेंसी को आठ प्रमुख बिंदुओं से जुड़े दस्तावेज दिए हैं और साथ ही विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म तथा यूट्यूब चैनलों पर संबंधित लोगों द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है।

जमीन खरीद और मूर्तियों से जुड़े आरोपों का भी जिक्र

दस्तावेज सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में संतोष दुबे ने दावा किया कि उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर कई गंभीर आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड एसआईटी को उपलब्ध कराए हैं। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों में जमीन खरीद से जुड़े कथित लेन-देन और मूर्तियों के गायब होने से संबंधित रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि एसआईटी की कार्यशैली से उन्हें उम्मीद जगी है कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी और यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।


  • एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कोर्ट जाने की तैयारी

    संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर अब तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। उन्होंने बताया कि अपनी शिकायत की प्रति एसआईटी को भी सौंप दी गई है। यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो पहले रिमाइंडर भेजा जाएगा और उसके बाद अदालत के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी मामले में छोटे आरोपियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया गया, लेकिन बड़े स्तर पर लगाए गए आरोपों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

    पत्थर खरीद में अनियमितता का लगाया आरोप

    धर्मसेना प्रमुख ने अपने दस्तावेजों में यह भी दावा किया है कि राजस्थान के वंशी पहाड़पुर क्षेत्र के एक खदान संचालक ने राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर नि:शुल्क उपलब्ध कराने की पेशकश की थी। आरोप है कि इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय ट्रस्ट ने वही पत्थर कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे।

    उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सामने आए कुछ बयानों का भी उल्लेख किया है तथा मांग की है कि जांच एजेंसी उनकी भी जांच करे।

    जमीन खरीद में करोड़ों रुपये के नुकसान का आरोप

    दस्तावेजों में कई भूमि खरीद सौदों पर भी सवाल उठाए गए हैं। संतोष दुबे का आरोप है कि कुछ जमीनों की वास्तविक बाजार कीमत से कई गुना अधिक राशि देकर खरीदारी की गई, जिससे ट्रस्ट के धन का दुरुपयोग हुआ।

    उन्होंने दावा किया कि एक मामले में लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य की जमीन 23 करोड़ रुपये में खरीदी गई, जबकि दूसरे मामले में करीब नौ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि 55 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुछ जमीनों के अधिग्रहण में नियमों के उल्लंघन का भी दावा किया गया है।

    ट्रस्ट के पुनर्गठन की भी उठाई मांग

    संतोष दुबे ने बताया कि उन्होंने जून 2026 में संबंधित अधिकारियों और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मौजूदा ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है।

    उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो ट्रस्ट में बदलाव किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन के कारसेवकों के परिजनों और समाज के विभिन्न वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए।

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