
डेस्क: देश के कई राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो कई राज्यों में ये काम अभी भी चल रहा है. कई राज्यों में इसको लेकर जमकर विवाद भी देखने को मिला है. यही वजह है कि ये विवाद चुनाव आयोग (Election Commission) पर कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं. चुनाव आयोग के सामने लोगों के लिए अपनी पहचान साबित करना एक चुनौती बन गया है. पहचान साबित करने के लिए लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. अमर्त्य सेन और क्रिकेटर मोहम्मद शमी के बाद अब भारत के पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (Former Navy Chief Admiral Arun Prakash) को भी नोटिस (Notice) भेजा गया है.
चुनाव आयोग ने अरुण प्रकाश को विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तहत अपनी पहचान साबित करने के लिए कहा है. इस नोटिस पर एडमिरल प्रकाश ने कहा कि अगर एसआईआर फॉर्म आवश्यक जानकारी नहीं दे रहे हैं तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए. इसको लेकर अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर किया है.
अरुण प्रकाश ने बताया कि वह पले ही अपना और अपने परिवार का फॉर्म भर चुके हैं. इसमें हमसे जो-जो जानकारी मांगी गई थी. हम लोगों ने उसे भर दिया था. उन्होंने कहा कि फॉर्म भरने के बावजूद भी चुनाव आयोग ने उन्हें और उनकी पत्नी को प्रत्यक्ष रूप से पेश होकर अपनी पहचान साबित करने को कहा है.
एडमिरल प्रकाश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मैंने 20 साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद कभी भी विशेष सुविधाओं की मांग नहीं की है. मेरी पत्नी और मैंने एसआईआर फॉर्म भरे थे और हमें खुशी है कि हमारे नाम गोवा ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 2026 में हैं. हम चुनाव आयोग के नोटिस का पालन करेंगे. एडमिरल प्रकाश ने यह भी कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को दो अलग-अलग तारीखों पर 18 किमी दूर उपस्थित होने के लिए कहा गया है, जो उनके लिए असुविधाजनक है.
उन्होंने चुनाव आयोग से एसआईआर फॉर्म को संशोधित करने का अनुरोध किया है. एडमिरल प्रकाश की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई लोगों ने इसे चुनाव आयोग की बड़ी चूक बताया है. एडमिरल अरुण प्रकाश न सिर्फ देश के पूर्व नेवी चीफ रह चुके हैं, बल्कि 1971 युद्ध के वीरता पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं.
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