
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर जिले की यह खबर आपको अंदर तक हिला देगी. जोधपुर के खेड़ापा थाना इलाके में हुई यह घटना केवल सामान्य घटना नहीं है बल्कि सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है. यह घटना राजस्थान पुलिस की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है. जोधपुर के बावड़ी इलाके की दो बहनों से गैंगरेप हो जाता है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी तमाशा देखती रहती है. गैंगरेप की शिकार हुई बेटियां न्याय की गुहार करती रही और पुलिस चुपचाप बैठी रही. आखिरकार पुलिस की बेशर्मी से तंग से आई दोनों बहनों ने एक के बाद एक करके जब सुसाइड कर लिया तब जाकर पुलिसिया सिस्टम की आंख खुली. फिर घटना वाले इलाके के चौकी प्रभारी को सस्पेंड कर कार्रवाई का ढोंग किया गया.
दरअसल गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग और सुसाइड की इस दुखभरी कहानी की शुरुआत मार्च माह में हुई. पूनिया की ढाणी बस्ती गांव के ई-मित्र संचालक ने एक महिला अपने जाल में फंसाया. उसके अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया. फिर उससे गैंगरेप किया गया. पीड़िता जब इसकी शिकायत लेकर पुलिस पास पहुंची तो उससे परिवाद लेकर रख लिया गया और केस दर्ज नहीं किया गया. पीड़िता पुलिस से न्याय की गुहार करती रही लेकिन पुलिस के सिस्टम पर कोई फर्क नहीं पड़ा. आखिरकार गैंगरेप की घटना से पीड़ित और पुलिस की कार्यशैली से आहत होकर पीड़िता ने 20 मार्च को अपनी जान दे दी. उसके बाद भी पुलिस के कान पर जूं तक नहीं रेंगी.
उसके बाद बड़ी बहन को न्याय दिलाने के लिए उसके छोटी बहन ने आवाज उठाई. उसकी लंबी जद्दोजहद के बाद 11 अप्रैल को 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. लेकिन गिरफ्तारी किसी भी आरोपी की नहीं की गई. जबकि पीड़िता सुसाइड तक कर चुकी थी. लेकिन पुलिस शायद सबूतों का इंतजार कर रही थी. इससे आरोपियों को हौंसले बुलंद हुए और उन्होंने मृतका की छोटी बहन पर नजरें गड़ा दी. उससे प्रताड़ित किया जाने लगा. उसके बाद उन्हीं आरोपियों ने उसे भी अपना शिकार बना लिया. आरोप है कि उसके साथ भी गैंगरेप किया गया.
इस पर पीड़िता 7 मई को एसपी के नाम पत्र भेजकर पुलिस पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया. उसके बावजूद पुलिस सुस्त रही और आरोपी चुस्त बने रहे. 10 मई से पीड़िता को आरोपियों की ओर से व्हाट्सऐप पर धमकियां देना शुरू कर दिया गया. इसकी जानकारी भी संबधित थानाधिकारी को दी गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया. 34 दिन तक कोई कार्रवाई नहीं होने से आहत होकर यह पीड़िता न्याय की मांग को लेकर 15 मई को पानी की टंकी पर चढ़ गई.
इसकी सूचना पर पुलिस और प्रशासन भी वहां पहुंच गया. पीड़िता ने पुलिस की मौजूदगी में सल्फास की गोलियां खा ली. उसके बाद पुलिस प्रशासन उसे नीचे उतारकर अस्पताल ले गया. लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई. इससे मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस के हाथ पांव कांपे और उसे अपनी ड्यूटी याद आई. दूसरी पीड़िता ने खुदकुशी की तो 3 दिन में मुख्य आरोपी समेत दो आरोपियों को पकड़ कर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपा ली. इसके साथ ही चौकी प्रभारी धर्मेंद्र को लाइन हाजिर कर ऑफिशियल एक्शन का तमगा भी लगा लिया. जबकि जांच से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. बड़ी बहन के केस की जांच भोपालगढ़ सीओ भूराराम खिलेरी को सौंपी गई थी, लेकिन उनके खिलाफ भी कोई एक्शन नहीं लिया गया.
अब जोधपुर ग्रामीण एसपी नित्या ठाकुर का कहना है कि मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. अन्य नामजद आरोपियों की तलाश जारी है. केस की जांच एडिशनल एसपी को सौंपी गई है. पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम करवाकर रविवार सुबह उसे परिजनों को सौंप दिया गया. उसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. सुसाइड का मामला अलग से दर्ज किया गया है. वहीं पहले से जो मामले दर्ज है उन सब को देखकर जांच आगे चल रही है. मृतका के मोबाइल की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन लोग थे जो उसे परेशान कर रहे थे. इस मामले अगर किसी अधिकारी ने ढिलाई बरती है तो उसके लिए भी एक जांच टीम बिठाई गई है. अगर कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा तो उस पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved