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31 हजार टन सोना बदलेगा भारत की अर्थव्यवस्था, गोल्ड के बाजार में Gen Z का बड़ा रोल

August 08, 2026

नई दिल्ली। भारत में सोने (Gold) को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है। कभी सोना सिर्फ परंपरा, आभूषण और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता था, लेकिन नई पीढ़ी इसे निवेश (Investment) के एक आधुनिक विकल्प के तौर पर देख रही है। खासतौर पर Gen Z के बीच डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों का चलन बढ़ रहा है। इसका असर आने वाले वर्षों में भारत के गोल्ड मार्केट (Gold Market) और अर्थव्यवस्था (Economy) दोनों पर दिखाई दे सकता है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गोल्ड निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। सोना अब केवल घर की तिजोरी या लॉकर तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल फोन के जरिए भी खरीदा और निवेश किया जा रहा है। नई पीढ़ी पारंपरिक गहनों के बजाय डिजिटल गोल्ड और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश को प्राथमिकता दे रही है।

2035 तक Gen Z की खरीद क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर
गोल्ड मार्केट में इस बदलाव में Gen Z की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। WGC के मुताबिक, वर्ष 2035 तक भारत में Gen Z की कुल खरीद क्षमता करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी उपभोक्ता शक्ति के साथ यदि इस पीढ़ी की गोल्ड खरीद और निवेश की प्राथमिकताएं बदलती हैं, तो इसका सीधा असर देश के गोल्ड मार्केट और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


  • गहनों से ज्यादा डिजिटल गोल्ड और ETF पर जोर
    रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z पारंपरिक तरीके से सोना खरीदकर अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने के बजाय इसे एक एसेट के तौर पर देख रही है। डिजिटल गोल्ड और GOLD ETF जैसे विकल्प युवाओं को इसलिए आकर्षित कर रहे हैं क्योंकि इनमें खरीदारी आसान है और जरूरत पड़ने पर निवेश को अपेक्षाकृत आसानी से नकदी में बदला जा सकता है। यानी नई पीढ़ी के लिए सोना केवल विरासत नहीं, बल्कि निवेश और वित्तीय प्रबंधन का साधन बनता जा रहा है।

    भारतीय घरों में पड़ा है 31 हजार टन से ज्यादा सोना
    भारत के पास करीब 880 टन आधिकारिक सोने का भंडार है, जबकि भारतीय घरों में 31 हजार टन से अधिक सोना मौजूद होने का अनुमान है। इसकी कीमत 315 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद घरों में रखा यह सोना सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं है। ASSOCHAM की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना दुनिया के शीर्ष 10 केंद्रीय बैंकों के कुल गोल्ड रिजर्व से भी अधिक है।

    सिर्फ 2% सोना अर्थव्यवस्था में आया तो बड़ा फायदा
    ASSOCHAM के अनुसार, अगर घरों में रखे सोने का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा भी वित्तीय साधनों में स्थानांतरित हो जाए, तो वर्ष 2047 तक भारत की GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि घरों में रखे सोने का 2 प्रतिशत अर्थव्यवस्था से जुड़ने पर भारत की GDP वर्ष 2047 तक 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। वहीं, अगर घरों में मौजूद सोने का 5 प्रतिशत हिस्सा अर्थव्यवस्था में शामिल हो जाए तो देश का आयात बिल करीब 90 अरब डॉलर तक कम हो सकता है।

    घर का सोना बना तो अर्थव्यवस्था की ताकत
    अगर परिवारों के पास पड़ा सोना वित्तीय प्रणाली में आता है तो उससे मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है। गोल्ड मॉनिटाइजेशन, गोल्ड-लिंक्ड सेविंग स्कीम और गोल्ड लोन जैसे माध्यमों से निष्क्रिय सोने को उत्पादक संपत्ति में बदला जा सकता है। गोल्ड लोन के बढ़ते आंकड़े भी इसी बदलाव की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन का आंकड़ा 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

    38 करोड़ से ज्यादा Gen Z बदल रही गोल्ड मार्केट की तस्वीर
    भारत में 38 करोड़ से अधिक Gen Z के उपभोक्ता बाजार में मौजूद होने का अनुमान है। इस पीढ़ी की बदलती पसंद ज्वेलरी इंडस्ट्री से लेकर गोल्ड निवेश तक के तौर-तरीकों को प्रभावित कर रही है। पारंपरिक आभूषणों की जगह डिजिटल गोल्ड और वित्तीय उत्पादों की ओर बढ़ता रुझान आने वाले समय में घरों में जमा सोने को आर्थिक गतिविधियों की मुख्यधारा से जोड़ सकता है। इससे सोने को एक Strategic National Asset के रूप में देखने की प्रवृत्ति भी मजबूत हो सकती है।

    बाजार को मिल सकते हैं ये फायदे
    – पुस्तैनी सोना बाजार में आने से पूंजी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
    – निवेश के लिए ज्यादा धन उपलब्ध हो सकता है।
    – घरेलू सोने का बेहतर इस्तेमाल होने से सोने के आयात में कमी आ सकती है।
    – आयात कम होने पर विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
    – निष्क्रिय सोना अर्थव्यवस्था में आकर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए पूंजी का स्रोत बन सकता है।

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