बीजिंग। चीन में डार्क टूरिज्म (Dark Tourism in China) का एक नया और अनोखा ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अब लोग सिर्फ युद्ध, भूकंप या हादसों से जुड़ी जगहें देखने नहीं जा रहे, बल्कि पैसे देकर खुद आपदा का अनुभव कर रहे हैं। युवा और परिवार नकली तूफान, मूसलाधार बारिश (Torrential rain) और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में उतरकर डर और संकट का सामना कर रहे हैं। इसके साथ उन्हें आपदा के दौरान बचाव और सर्वाइवल स्किल्स की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
चीन के हांग्जो में स्थित लवक्सिंग बेस इस तरह के अनुभव का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। सितंबर 2024 में शुरू हुए इस केंद्र को चीन का पहला इमर्सिव प्राकृतिक आपदा सिमुलेशन सेंटर बताया जा रहा है।
12 हजार रुपये देकर तूफान और बाढ़ का अनुभव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां वयस्कों को नकली तूफान, भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ का अनुभव करने के लिए 899 युआन यानी करीब 12,750 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
वहीं करीब 5,000 युआन के फैमिली पैकेज में जंगल में जीवित रहने और पानी से बचाव जैसी ट्रेनिंग भी शामिल है। 6 से 14 साल के बच्चे भी कुछ चुनिंदा गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं।
सिमुलेशन सेंटर में ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं, जो वास्तविक आपदा जैसा अनुभव देती हैं। बताया गया है कि यहां 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवाएं पैदा की जा सकती हैं। गतिविधि शुरू होने से पहले प्रतिभागियों को थर्मल सूट और हेलमेट पहनाए जाते हैं।
प्रशिक्षक आपदा के दौरान बचाव के तरीके बताते हैं और सुरक्षा कर्मचारी पूरे अभ्यास के दौरान मौजूद रहते हैं।
गर्दन तक पहुंच गया पानी, डर से भूल गईं कि सब नकली है
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बातचीत में शियाओफेई नाम की एक प्रतिभागी ने बताया कि उन्होंने इससे पहले कभी तूफान या बाढ़ को इतने करीब से महसूस नहीं किया था।
बाढ़ के सिमुलेशन के दौरान भूमिगत पार्किंग में पानी भरने लगा और पानी उनकी गर्दन तक पहुंच गया। उनका कहना था कि उस समय पैदा हुआ डर इतना वास्तविक था कि कुछ देर के लिए वह भूल गईं कि यह सिर्फ एक अभ्यास है।
अचानक बाढ़ के अभ्यास के दौरान तेज पानी के बहाव ने उन्हें कंक्रीट के खंभे से टकरा दिया, जिससे उनके पैर पर चोट भी आई। उनके समूह में विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। संकट के दौरान सभी ने एक-दूसरे की मदद की।
आखिर क्यों पैसे खर्च कर रहे हैं लोग?
वुहान विश्वविद्यालय के समाज कार्य के प्रोफेसर झांग योंग के मुताबिक, आज के दौर में जब लोग लगातार प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं, ऐसे अनुभव उन्हें यह महसूस करने का मौका देते हैं कि वे संकट की स्थिति में कितना बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
यानी इन गतिविधियों का मकसद सिर्फ डर का अनुभव करना नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में खुद को संभालने और जीवित रहने की क्षमता को परखना भी है।
‘क्रेजी कपल’ के अनुभवों से आया आइडिया
इस तरह के कार्यक्रम के पीछे झांग शिन्यु और लियांग होंग की कहानी भी जुड़ी है। इस चीनी दंपती ने वर्ष 2012 से दुनिया के कई खतरनाक और चुनौतीपूर्ण इलाकों की यात्रा की है।
दोनों ज्वालामुखी के अंदर जा चुके हैं। वे चेर्नोबिल के रेडिएशन प्रभावित क्षेत्र, मध्य पूर्व के युद्ध क्षेत्रों और अंटार्कटिका तक की यात्रा कर चुके हैं। अंटार्कटिका में ही दोनों ने शादी भी की थी।
अब उनका लक्ष्य अपने इन अनुभवों को व्यवस्थित सर्वाइवल और आपदा प्रशिक्षण कार्यक्रम में बदलना है, ताकि लोगों को संकट से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जा सकें और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित हो।
डार्क टूरिज्म के इस नए रूप ने नैतिक बहस भी शुरू कर दी है। समर्थकों का कहना है कि अगर लोग खुद आपदा जैसी परिस्थितियों का सुरक्षित तरीके से अनुभव करके सर्वाइवल स्किल्स सीखते हैं तो यह उपयोगी हो सकता है।
लेकिन आलोचकों का सवाल है कि क्या असली लोगों की त्रासदी को मनोरंजन और कारोबार का हिस्सा बनाया जाना उचित है?
बाढ़ या भूकंप में अपना घर और परिवार गंवाने वाले लोगों के लिए आपदा कोई रोमांच नहीं, बल्कि वास्तविक त्रासदी होती है। ऐसे में नकली आपदा का अनुभव लेने के लिए पैसे खर्च करने की प्रवृत्ति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
चीन में असली त्रासदी से जुड़ी जगहें भी हैं
चीन में डार्क टूरिज्म का यह नया व्यावसायिक रूप अलग है। देश में ऐसी कई जगहें भी हैं, जहां लोग वास्तविक त्रासदियों और इतिहास को समझने के लिए जाते हैं।
इनमें 2008 के सिचुआन वेंचुआन भूकंप से जुड़े स्मारक और नानकिंग हत्याकांड से संबंधित स्थल शामिल हैं। यहां किसी नकली आपदा का अनुभव नहीं कराया जाता, बल्कि वास्तविक घटनाओं और उनसे जुड़ी सामूहिक स्मृति को सामने रखा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी जगहें लोगों को मौत और त्रासदी को समझने तथा इतिहास से सीखने का अवसर देती हैं। वहीं चीन में तेजी से लोकप्रिय हो रहे आपदा सिमुलेशन सेंटर अब डर, रोमांच और सर्वाइवल ट्रेनिंग को एक साथ जोड़कर डार्क टूरिज्म का नया रूप तैयार कर रहे हैं।
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