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बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा कहीं बीमारी का संकेत तो नहीं? थायरॉइड से ब्लड शुगर तक ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

October 04, 2026

नई दिल्ली: किसी बात पर नाराजगी (Displeasure) या परिस्थितियां अपेक्षा (Expectations) के मुताबिक न होने पर गुस्सा (Anger) और चिड़चिड़ापन (Irritability) होना सामान्य प्रतिक्रिया है। ऐसी भावनाएं कुछ समय बाद अपने आप खत्म हो जाती हैं और व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगे या चिड़चिड़ापन लगातार बना रहे, तो इसके कारणों को समझना जरूरी हो जाता है। हर समय चिड़चिड़ापन रहना या लोगों से बात करने का मन न करना अक्सर खराब मूड (Mood) और तनाव (Stress) से जोड़ा जाता है, लेकिन इसकी वजह हमेशा मानसिक तनाव (Mental Stress) नहीं होती। शरीर में होने वाली कुछ गड़बड़ियां (Disorders) भी मूड और व्यवहार (Behavior) में बदलाव ला सकती हैं।

नींद की कमी भी लगातार चिड़चिड़ापन बढ़ाने का एक कारण हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि ध्यान, याददाश्त और भावनाओं पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। लगातार कम नींद या खराब नींद के कारण व्यक्ति ज्यादा चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त महसूस कर सकता है। देर रात तक मोबाइल देखना, रोज अलग-अलग समय पर सोना और ज्यादा कैफीन वाली चीजों का सेवन नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ सकता है। इसलिए लगातार मूड खराब रहने की स्थिति में नींद की गुणवत्ता और दिनचर्या पर भी ध्यान देना जरूरी है।

थायरॉइड की समस्या भी चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव से जुड़ी हो सकती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन का स्तर ज्यादा होने पर हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति हो सकती है, जिसमें बेचैनी, घबराहट, नींद में परेशानी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके साथ धड़कन तेज होना, वजन कम होना और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर इलाज जरूरी माना जाता है। लगातार चिड़चिड़ापन रहने पर थायरॉइड से जुड़े कारणों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

ब्लड शुगर का नियंत्रण बिगड़ना भी मूड पर असर डाल सकता है। ब्लड शुगर कम होने पर कमजोरी, कंपकंपी, पसीना आने के साथ घबराहट और चिड़चिड़ापन हो सकता है। डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जा सकती है। अगर चिड़चिड़ापन किसी खास समय पर बार-बार होता है और उसके साथ ये लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी भी भावनात्मक समस्याओं को बढ़ा सकती है। आयरन, विटामिन बी12 और फोलेट की कमी से थकान, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, जिसका असर मूड पर भी पड़ सकता है।


  • इस तरह लगातार चिड़चिड़ापन को केवल स्वभाव या खराब मूड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तनाव और चिंता के अलावा नींद की कमी, थायरॉइड में बदलाव, ब्लड शुगर का असंतुलन और पोषण की कमी भी इसके पीछे कारण हो सकते हैं। खासकर जब चिड़चिड़ापन लंबे समय तक बना रहे या उसके साथ बेचैनी, नींद की परेशानी, कमजोरी, कंपकंपी, पसीना या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसके संभावित कारणों को समझना जरूरी है।

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