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इजरायल-हमास युद्ध से बिगड़ी स्वास्थ्य सेवाएं, नए मरीजों को लेने से मना कर रहे गाजा के अस्पताल

गाजा (Gaza) । इजरायल और हमास (Israel and Hamas) के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर अब स्वास्थ्य सेवाओं (health services) पर पड़ता नजर आ रहा है। खबर है कि रविवार को उत्तरी गाजा में दो बड़े अस्पतालों में नए मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। स्टाफ के हवाले से कहा जा रहा है कि अस्पतालों ने इजरायल की बमबारी और ईंधन-दवाओं की कमी के चलते यह फैसला लिया है। इधर, इजरायल का आरोप है कि अस्पतालों में हमास के लड़ाकों को रखा जा रहा है और उन्हें खाली कराया जाना चाहिए।

रविवार को गाजा के सबसे बड़े अस्पताल अल शिफा और अल-कुद्स ने कहा कि वे रविवार से काम बंद कर रहे हैं। हर रोज कई लोगों को मौत हो रही है और घायल हो रहे हैं, लेकिन घायलों के इलाज के लिए थोड़ी ही जगह मौजूद हैं। मेडिकल स्टाफ का कहना है कि फिलिस्तीन के उत्तर में मौजूद अस्पतालों को इजरायली बलों ने घेर लिया है और वे अंदर मौजूद लोगों का मुश्किल से इलाज कर पा रहे हैं।


अल शिफा में मौजूद एक प्लास्टिक सर्जन का कहना है कि उन्हें मजबूरी में नवजातों को आम बिस्तरों पर शिफ्ट करना पड़ा। डॉक्टर अहमद अल मोखल्लालाती ने कहा, ‘हम जानते हैं कि यह बेहद जोखिमभरा है।’ गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल-किदरा भी अस्पताल के अंदर मौजूद थे। उन्होंने कहा, इजरायली की तरफ से जारी हमलों के कारण भवन के अंदर मौजूद मेडिकल अधिकारी और आम नागरिक डरे हुए हैं।

इजरायल के आरोप
इजरायल का कहना है कि हमास ने अस्पतालों के नीचे और पास में कमांड सेंटर बनाए हैं और उन्हें 200 बंधकों को मुक्त कराने के लिए उन तक पहुंचने की जरूरत है। इधर, हमास ने अस्पतालों के इस तरह से इस्तेमाल से साफ इनकार किया है। रविवार को फिलिस्तीन के एक अधिकारी ने बंधकों की रिहाई को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इजरायल ने शिफा अस्पताल की स्थिति को जिस तरह संभाला था, उसके बाद हमास ने बातचीत बंद कर दी थी।

इजरायली सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने कहा कि रविवार को सेना ने शिफा से बच्चों को निकालने में मदद की थी। जबकि, किदरा का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं दी गई कि कैसे बच्चों को सुरक्षित स्थान तक ले जाया जाए। उनका कहना है कि कुल 45 बच्चे थे, जिनमें से तीन की पहले ही मौत हो चुकी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि अस्पतालों को ईंधन की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

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