
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना पाकिस्तान सीमा पर अपनी हवाई ताकत को और मजबूत करने जा रही है. वायुसेना ने स्वदेशी तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों के पहले चार स्क्वाड्रनों को राजस्थान के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात करने की योजना बनाई है. इसका मकसद पश्चिमी मोर्चे पर तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ाना और युद्ध जैसी स्थिति में लगातार ऑपरेशन चलाना है.
सूत्रों के मुताबिक, साल 2026 यानी इसी साल बीकानेर स्थित नाल एयरफोर्स स्टेशन तेजस Mk1A का मुख्य बेस बनेगा. यहां तेजस Mk1A के पहले और तीसरे स्क्वाड्रन को तैनात किया जाएगा. ये विमान लंबे समय से सेवा दे रहे MiG-21 बाइसन स्क्वाड्रनों की जगह लेंगे.
वहीं राजस्थान का फालोदी एयरफोर्स स्टेशन दूसरे तेजस Mk1A स्क्वाड्रन का बेस होगा. यहां स्वदेशी लड़ाकू विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. आने वाले समय में नाल और फालोदी, पश्चिमी सेक्टर में भारत के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ऑपरेशन के मुख्य केंद्र बन जाएंगे.
सूत्रों के अनुसार, सीमा के करीब तेजस Mk1A की तैनाती भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति को दिखाती है. फॉरवर्ड एयरबेस पर विमान तैनात होने से दुश्मन की किसी भी गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी. इससे क्विक रिएक्शन अलर्ट क्षमता मजबूत होगी और जरूरत पड़ने पर ज्यादा संख्या में sorties यानी लड़ाकू मिशन उड़ाए जा सकेंगे.
तेजस Mk1A को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है. इसमें AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, लंबी दूरी की Astra BVR मिसाइल और मिड-एयर रिफ्यूलिंग जैसी क्षमताएं शामिल हैं. ये सुविधाएं इसे पुराने MiG-21 के मुकाबले कहीं ज्यादा घातक और आधुनिक बनाती हैं.
इन विमानों की तैनाती से पहले नाल और फालोदी एयरबेस पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया गया है. इसमें Hardened Aircraft Shelters (HAS), आधुनिक मेंटेनेंस हैंगर और मिशन प्लानिंग सेंटर शामिल हैं, ताकि किसी भी युद्ध स्थिति में विमानों को सुरक्षित और लगातार ऑपरेशनल रखा जा सके.
यह तैनाती आत्मनिर्भर भारत रक्षा अभियान को भी मजबूत करेगी. भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से कुल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है. इससे भारत की सीमाओं की सुरक्षा स्वदेशी तकनीक से होगी और युद्ध के समय विदेशी स्पेयर पार्ट्स या सपोर्ट पर निर्भरता कम होगी.
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