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भारत और पाकिस्तान ने साझा की कैदियों की सूची, जानिए दोनों देशों की जेलों में कितने नागरिक और मछुआरे बंद

July 03, 2026

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) ने द्विपक्षीय समझौते (Bilateral agreements) के तहत एक-दूसरे की जेलों में बंद कैदियों की ताजा सूची का आदान-प्रदान किया है। राजनयिक माध्यमों से साझा की गई इस सूची में दोनों देशों की जेलों में बंद नागरिकों और मछुआरों की संख्या का ब्योरा दिया गया है।

यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को की जाती है, ताकि एक-दूसरे के यहां बंद नागरिकों और मछुआरों की जानकारी साझा की जा सके।

पाकिस्तान की जेलों में कितने भारतीय?

ताजा सूची के अनुसार, पाकिस्तान की जेलों में इस समय कुल 250 भारतीय बंद हैं। इनमें—



  • 52 भारतीय नागरिक
    198 भारतीय मछुआरे

    शामिल हैं। ये मछुआरे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा का अनजाने में उल्लंघन करने के मामलों में हिरासत में हैं।

    भारत की जेलों में कितने पाकिस्तानी?

    भारत द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जेलों में कुल 439 पाकिस्तानी नागरिक बंद हैं। इनमें—

    386 नागरिक कैदी
    53 पाकिस्तानी मछुआरे

    शामिल हैं।

    भारत ने उठाई रिहाई की मांग

    सूची के आदान-प्रदान के साथ भारत ने पाकिस्तान से उन भारतीय कैदियों को जल्द रिहा करने की अपील की है, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने विशेष रूप से 188 भारतीय कैदियों की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग की है।

    इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान से 13 ऐसे कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस (राजनयिक अधिकारियों से मिलने की अनुमति) देने का भी अनुरोध किया है, जिन्हें भारतीय माना जा रहा है, लेकिन अब तक भारतीय अधिकारियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली है।

    पाकिस्तान ने भी रखी अपनी मांग

    दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भी भारत से अपने 97 कैदियों की रिहाई का अनुरोध किया है। दोनों देशों के बीच कैदियों की रिहाई और कांसुलर पहुंच का मुद्दा लंबे समय से मानवीय आधार पर उठता रहा है।

    हर छह महीने में होती है प्रक्रिया

    भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2008 में हुए कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपनी-अपनी जेलों में बंद दूसरे देश के नागरिकों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान करते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों की पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें कांसुलर सहायता उपलब्ध कराना और सजा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई एवं स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

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