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अब वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत, 5800 करोड़ के सौदे की संभावना

May 01, 2026

नई दिल्ली। भारत (India) और वियतनाम (Vietnam) के बीच सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Supersonic Cruise Missile) ब्रह्मोस (BrahMos) का सौदा जल्द हकीकत बनने जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की अगले हफ्ते होने वाली तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान करीब 5,800 करोड़ रुपये के इस समझौते पर मुहर लगने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति तो लाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर 5 से 7 मई तक भारत यात्रा पर आएंगे। इस दौरान पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी। राष्ट्रपति लाम के साथ वियतनाम के कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आ रहा है, जो मुंबई में आर्थिक समझौतों पर चर्चा करेगा। अपनी यात्रा के दौरान वियतनाम का प्रतिनिधिमंडल बोधगया भी जाएगा। यह दौरा भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक दशक पूरा होने के उपलक्ष्य में हो रहा है, जिसकी आधारशिला साल 2016 में पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान रखी गई थी।


  • वियतनान के ताकतवर नेता हैं तो लाम
    तो लाम वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति, दोनों पदों पर आसीन हैं। वह दशकों में वियतनाम के सबसे प्रभावशाली नेता बन गए हैं। इसी महीने राष्ट्रपति बनने के बाद तो लाम का इतनी जल्दी भारत आना यह दर्शाता है कि हनोई अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए नई दिल्ली को कितना महत्वपूर्ण मानता है।

    समुद्र में बढ़ेगी ताकत
    प्रस्तावित सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण शामिल है। यह दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को जरूरी मजबूती देगा। भारत और वियतनाम के बीच तमाम रक्षा समझौतों के बाद ब्रह्मोस का सौदा दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नई ऊंचाई देगा। ब्रह्मोस मिसाइल के इस निर्यात को रूस ने अपनी मंजूरी दे दी है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसका विकास भारत और रूस ने साझा तौर पर किया है।

    फिलीपीन को ब्रह्मोस देने का क्या है सामरिक महत्व?
    फिलीपीन भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दुनिया का पहला देश है। हाल ही में ब्रह्मोस का ऐसा ही समझौता इंडोनेशिया से भी हुआ है। इन मिसाइलों को इंडोनेशियाई युद्ध पोतों पर तैनात किया जाएगा, जिससे दक्षिण चीन सागर में इंडोनेशिया की स्थिति मजबूत होगी। अब फिलीपीन और इंडोनेशिया के बाद वियतनाम इस कतार में तीसरा बड़ा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश होगा। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ब्रह्मोस की बढ़ती मांग चीन के समुद्री प्रभाव के बीच क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार होगी।

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