
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जहां भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) की नौसेनाएं (Navies) बेहद करीब काम करती नजर आईं। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबरों के बावजूद इस क्षेत्र में तनाव बरकरार है।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन के अनुसार, ओमान तट के पास दोनों देशों के नौसैनिक जहाज महज 18 समुद्री मील की दूरी पर देखे गए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना को साझा करते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दोनों देश अपने-अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में जुटे हैं।
भारतीय नौसेना इस समय ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। फारस की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल से जुड़े जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का काम किया जा रहा है। नौसेना के युद्धपोत तनावग्रस्त इलाकों से गुजरने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं, ताकि उनकी यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। अनुमान है कि भारत के 10 से अधिक जहाज अभी भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं।
A rare event observed a short while ago: Indian and Pakistani navy vessels are operating just 18 nautical miles apart off the coast of Oman, likely as both countries work to secure their merchant shipping interests amid the West Asia conflict pic.twitter.com/QL5quM7gm2
— Damien Symon (@detresfa_) April 16, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख बरकरार है, जबकि ईरान इससे पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी जारी है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि यदि ठोस समझौता होता है तो वह होर्मुज क्षेत्र में ओमान की ओर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। बदले में ईरान लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत चाहता है।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि यदि शांति समझौता होता है तो वह खुद उसमें शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौते पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद में होते हैं, तो वह वहां जाने पर विचार कर सकते हैं। लगातार बदलते हालात के बीच होर्मुज क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील बना हुआ है, जहां हर गतिविधि पर दुनिया की नजर टिकी है।
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