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भारत में बनेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन: मिडिल क्लास के लिए भी किफायती किराया, जानें क्या हो सकता है नाम

May 03, 2026

 

नई दिल्ली। भारतीय रेल(Indian Railways) अब हाई-स्पीड ट्रेनों (now moving towards)के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव(major transformation) की ओर बढ़(high-speed trains) रही है। अब तक जापान की शिंकानसेन तकनीक(Shinkansen technology) पर निर्भर रहने वाला भारत जल्द ही अपनी स्वदेशी बुलेट ट्रेन(own indigenous bullet train) तैयार करने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के अनुसार(Railway Board), इस परियोजना का उद्देश्य विदेशी(project is to reduce dependence) तकनीक पर निर्भरता कम करना और लागत को नियंत्रित(foreign technology) करना है।

‘बी28’ कोडनेम से बन रही है बुलेट ट्रेन
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को फिलहाल बी28 (Bullet Train-28) नाम दिया गया है।
इसका ट्रायल रन अगस्त 2027 में पूरा किए जाने की योजना है।
इसके बाद वर्ष 2028 के मध्य तक अहमदाबाद–मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर के सूरत, बिलिमोरा और वापी सेक्शन पर यात्री इस ट्रेन से सफर कर सकेंगे, जिसमें गति लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी।

क्या होगा नाम?
सूत्रों के अनुसार लॉन्च के समय इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन का नाम हो सकता है:
वंदे भारत प्रो
अमृत भारत हाई स्पीड
हालांकि अंतिम नाम पर अभी विचार जारी है।

लागत में बड़ा अंतर, भारत को फायदा
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस परियोजना के पीछे सबसे बड़ा कारण लागत में भारी अंतर है।जापानी तकनीक वाली बुलेट ट्रेन: लगभग 250–300 करोड़ रुपये प्रति यूनिटस्वदेशी भारतीय मॉडल: लगभग 120–140 करोड़ रुपये प्रति यूनिटइससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।
मिडिल क्लास के लिए भी आसान सफर
अधिकारी के अनुसार, कम लागत का सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा।बुलेट ट्रेन का किराया अब केवल प्रीमियम या अमीर वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्यम वर्ग के लोग भी इसका उपयोग कर सकेंगे।

क्या होगा खास इस ट्रेन में?
स्वदेशी बुलेट ट्रेन को वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसमें कई आधुनिक बदलाव होंगे
हल्की और मजबूत बॉडी
वंदे भारत ट्रेन स्टील से बनी होती है
जबकि नई बुलेट ट्रेन एक्सट्रूडेड एल्युमीनियम से तैयार की जा रही है

शोर कम करने वाली तकनीक
280 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी टनल में शोर कम रहेगा
खास नोज-कोन डिजाइन हवा को काटकर सोनिक बूम को कम करेगा


  • चलता-फिरता डाटा सेंटर
    ट्रेन में हजारों सेंसर लगाए जाएंगे
    हर तकनीकी खराबी की जानकारी रियल टाइम में ड्राइवर को मिलेगी
    पहियों और सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग होगी

    आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
    यह परियोजना केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत भविष्य में बुलेट ट्रेन तकनीक का निर्यात भी कर सकेगा।स्वदेशी बुलेट ट्रेन भारत के रेल नेटवर्क में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।जहां एक ओर यह तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा का अनुभव देगी, वहीं दूसरी ओर मिडिल क्लास के लिए भी हाई-स्पीड रेल यात्रा को संभव बनाएगी।भारत अब स्वदेशी बुलेट ट्रेन तैयार करने जा रहा है, जो कम लागत और आधुनिक तकनीक के साथ 280 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।इसका उद्देश्य हाई-स्पीड रेल को मिडिल क्लास तक पहुंचाना और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करना है।

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