
लेबल पर सामग्री में अगर फ्लेवर लिखा है मतलब नकली है शराब… सिर्फ ब्रांड और कीमत देखकर बोतल न खरीदें, सामग्री भी जरूर देखें
इंदौर। जिस तरह दूध, घी, मसाले, बिस्किट या किसी भी पैक्ड खाद्य पदार्थ को खरीदते समय लोग उसकी एमआरपी (MRP), पैकिंग डेट, एक्सपायरी डेट (Packing date, expiry date) और इंग्रीडिएंट लिस्ट देखते हैं, उसी तरह अब शराब (liquor) खरीदते समय भी बोतल पर लिखी जानकारी पढ़ना जरूरी हो गया है। खासतौर पर इंग्रीडिएंट लिस्ट (सामग्री)। अब तक अधिकांश लोग शराब खरीदते समय केवल ब्रांड और कीमत पर ध्यान देते थे, लेकिन हाल के दिनों में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की जांच में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि शराब में भी भारी गड़बड़ियां हो रही हैं, लेकिन उपभोक्ता सिर्फ लेबल पढ़कर इसे आसानी से समझ सकते हैं और नकली शराब से बच सकते हैं।
महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क रम और मैकडॉवेल्स नंबर-1 रम के नमूने जांच में फेल होने के बाद इंदौर से भी छह बड़े ब्रांड्स के सैंपल फेल पाए गए। जांच में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि व्हिस्की और रम की इन बोतलों में वास्तविक रम या व्हिस्की के बजाय उनके फ्लेवर का उपयोग किया गया था। एफएसएसएआई के अनुसार यदि किसी उत्पाद में केवल फ्लेवर मिलाया गया है तो उसे मूल रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत और बेचा नहीं जा सकता। यही कारण है कि ऐसे मामलों में मिसब्रांडिंग, मिसलीडिंग और सब-स्टैंडर्ड बताते हुए सैंपलों को फेल किया गया है और इनकी बिक्री प्रतिबंधित की जा रही है। ऐसे में अब उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी बढ़ गई है। यदि लोग बोतल खरीदने से पहले इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ना शुरू कर दें तो कंपनियों पर भी शुद्ध और नियमों के अनुरूप उत्पाद बाजार में उतारने का दबाव बढ़ेगा। जिस तरह खाद्य पदार्थों में लोग सामग्री देखकर फैसला करते हैं, उसी तरह शराब में भी यह आदत अब जरूरी हो गई है।
हर फ्लेवर वाली शराब गलत नहीं
यह भी जरूरी नहीं कि हर फ्लेवर वाली शराब नियमों के खिलाफ हो। बाजार में कई शराब फ्लेवर में ही आती है, जैसे कॉफी और लेमन फ्लेवर रम, लेमन, ओरेंज, ग्रीन एप्पल, जामुन, मैंगो जैसे फ्लेवर की वोदका और बीयर और वाइन, लेकिन यहां भी निर्माता कंपनियों को इन फ्लेवर्स का उल्लेख अलग से करना जरूरी है, लेकिन अगर कंपनियां रम में रम का फ्लेवर और उसे काफी या लेमन का फ्लेवर देने के लिए अलग से एक और फ्लेवर मिला रही है, यानी यहां भी गड़बड़ी है।
सबसे महत्वपूर्ण- इंग्रीडिएंट लिस्ट
यदि इंग्रीडिएंट में एडेड नेचर आइडेंटिकल फ्लेवरिंग सब्सटेंसेस, आर्टिफिशियल फ्लेवर, रम फ्लेवर या व्हिस्की फ्लेवर जैसे शब्द लिखे हों तो उसे ध्यान से पढ़ें। यदि उत्पाद खुद को रम या व्हिस्की बता रहा है, लेकिन सामग्री में मूल शराब के बजाय उसका फ्लेवर लिखा है, तो यह उपभोक्ता के लिए साफ संकेत है कि बोतल में मूल शराब के बजाए सिर्फ उसका फ्लेवर मौजूद है।
गड़बड़ी मिले तो शिकायत करें
उपभोक्ताओं के जागरूक होने से भी गड़बड़ी कर रहे शराब निर्माताओं के उत्पादन की बिक्री प्रभावित होगी और वह इसे बंद करेंगे, साथ ही उपभोक्ता सीधे एफएसएसएआई कार्यालय या वेबसाइट पर भी इस तरह की गड़बड़ियों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिसे जांच में लिया जाएगा और आगे कार्रवाई भी की जाएगी।
असली पहचान प्राकृतिक स्वाद और सुगंध, फ्लेवर नहीं
एफएसएसएआई के अनुसार रम और व्हिस्की जैसे (डिस्टिल्ड) मादक पेय पदार्थों का विशिष्ट स्वाद (टेस्ट), सुगंध (अरोमा) और फ्लेवर उनकी निर्माण प्रक्रिया के दौरान प्राकृतिक रूप से विकसित होना चाहिए। यह स्वाद और सुगंध फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और कई मामलों में लकड़ी के बैरल में परिपक्व (एजिंग/मैच्योरेशन) होने की प्रक्रिया से स्वत: तैयार होती है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा एवं मानक (अल्कोहलिक बेवरेजेज) विनियम, 2018 में रम और व्हिस्की के लिए अलग से रम फ्लेवर या व्हिस्की फ्लेवर मिलाने का प्रावधान नहीं है। यदि किसी उत्पाद में मूल रम या व्हिस्की के स्थान पर केवल उसका फ्लेवर मिलाया जाता है और फिर उसे उसी नाम से बेचा जाता है, तो यह उपभोक्ता को भ्रमित करने वाला माना जाता है। यही कारण है कि अब शराब खरीदते समय बोतल की इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ना उतना ही जरूरी हो गया है, जितना किसी अन्य पैक्ड खाद्य पदार्थ की सामग्री पढ़ना।
बोतल पर ये 6 बातें जरूर देखें
– एमआरपी और एमएसपी
– निर्माण (बैच) और पैकिंग की जानकारी
– निर्माता और बॉटलिंग प्लांट का नाम
– अल्कोहल प्रतिशत ( प्रतिशत एबीवी)
– एफएसएसएआई लाइसेंस संबंधी विवरण
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