नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव (West Bengal Assembly by-election) से पहले निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय (Mamata Banerjee and Aroop Roy) के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों खुद को पार्टी के रूप में दावा कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत मामले में विस्तृत फैसला जरूरी है। अंतिम फैसला होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न प्राथमिकता क्रम में बताने को कहा है। आयोग इनमें से किसी एक नाम और चिह्न को संबंधित गुट के लिए मंजूरी दे सकता है।
आयोग के अनुसार दोनों गुट मौजूदा उपचुनाव में ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके लिए आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था मौजूदा उपचुनावों के उद्देश्य से की गई है और विवाद पर अंतिम निर्णय तक जारी रहेगी।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के इस अंतरिम आदेश की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव एवं संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगाना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देर रात जन्मदिन का तोहफा’ देने जैसा है।
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि आयोग का यह कदम भाजपा के खिलाफ लड़ने वाले राजनीतिक दलों को कमजोर करने की दिशा में है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयोग ने इससे पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मामलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की थी।
वेणुगोपाल ने आयोग के फैसले की निंदा करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए टीएमसी का चुनाव चिह्न बहाल करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी आयोग के आदेश पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि टीएमसी से अलग हुए गुट के पास पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर वैध दावा नहीं है। ये कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक आरोप और उनकी व्याख्या हैं।
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Freezing the AITC name and symbol – after a blatantly unconstitutional hijack by the BJP – is CEC Gyanesh Kumar’s late night birthday gift to Modi ji.
Those who fought against the BJP, under Mamata Banerjee’s leadership, are now being given the red carpet to rebel against her… https://t.co/6r2jjFGJf1
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) September 17, 2026
निर्वाचन आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदिग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले आया है। दोनों गुटों ने इन चुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। आयोग ने कहा कि दोनों पक्षों के दावों पर विस्तृत सुनवाई और निर्णय के लिए पर्याप्त समय नहीं है, इसलिए फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतरिम आदेश किसी गुट को पार्टी के नाम या चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार प्रदान नहीं करता। दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आगे की कार्यवाही के बाद किया जाएगा।
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