कोलकाता। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से पहले विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) सांसद कनिमोई के बीच कोलकाता में हुई मुलाकात के बाद कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी दल की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
कनिमोई ने गुरुवार को कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पहले कनिमोई शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले से भी मुलाकात कर चुकी हैं। उनके आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिलने की भी चर्चा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के एक नेता ने कांग्रेस के बिना तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाशने की बात कही है। वहीं, टीएमसी के एक सांसद ने कहा कि ममता बनर्जी के डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ अच्छे संबंध हैं। उनके मुताबिक, ममता गैर-एनडीए दलों के साथ भी संबंध बनाए रखती हैं और INDIA ब्लॉक के उन घटक दलों के करीब हैं जो कांग्रेस के समर्थक नहीं हैं।
हालांकि, टीएमसी सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि कनिमोई और ममता बनर्जी की बैठक के अलावा किसी संभावित गठबंधन को लेकर कुछ भी कहना फिलहाल अटकलें होंगी।
तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं और दोनों दलों ने विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में साथ चुनाव लड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के राजनीतिक समीकरण में बदलाव आया। कांग्रेस के दूसरे राजनीतिक गठजोड़ की ओर जाने के बाद डीएमके ने कांग्रेस की आलोचना की और INDIA ब्लॉक से दूरी बनाए रखी।
यही वजह है कि डीएमके और कांग्रेस के बीच बदले रिश्तों को ममता बनर्जी और कनिमोई की मुलाकात के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों को लेकर भी मतभेद की चर्चा रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि टीएमसी ने रेजीनगर सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगा था और बदले में नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, टीएमसी नेताओं ने इस दावे से इनकार किया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने पीटीआई को बताया था कि टीएमसी की ओर से ऐसा प्रस्ताव आया था। उनके अनुसार, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर समय मांगा और बाद में प्रदेश नेताओं के साथ चर्चा की गई, लेकिन प्रदेश नेतृत्व ने तत्काल गठबंधन को उचित नहीं माना।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने भी टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा था कि सत्ता में रहते हुए उसने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए ऐसा प्रस्ताव नहीं दिया था।
कांग्रेस और भाजपा से अलग राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिशें नई नहीं हैं। वर्ष 2013 में ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस और भाजपा से अलग गठबंधन की संभावनाएं तलाशने की कोशिश की थी। इसके बाद 2018 में तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क किया था।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की ओर से भी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशें हुई थीं।
फिलहाल ममता बनर्जी और कनिमोई की बैठक के बाद नए क्षेत्रीय गठबंधन की चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन इसके स्वरूप, नेतृत्व और कांग्रेस की भूमिका को लेकर कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
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