वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच फिलहाल संघर्षविराम (ceasefire) लागू है और कूटनीतिक स्तर पर समाधान की कोशिशें जारी हैं। हालांकि इस बीच ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों ने अमेरिकी सैन्य ढांचे (US military structure) को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में बड़े पैमाने पर तबाही की खबर सामने आई है।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में कई अहम सैन्य संसाधन नष्ट हो गए हैं। रडार सिस्टम, रनवे और एयरक्राफ्ट को भारी क्षति पहुंची है, जिससे अमेरिकी सैन्य ऑपरेशंस और निगरानी क्षमताओं पर सीधा असर पड़ा है। शुरुआती आकलन के मुकाबले नुकसान कहीं अधिक बताया जा रहा है, हालांकि इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मरम्मत में खर्च होंगे अरबों डॉलर
अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया है कि प्रभावित ठिकानों की मरम्मत में कई बिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। जानकारी के अनुसार, करीब सात देशों में मौजूद बेस प्रभावित हुए हैं, जहां स्टोरेज वेयरहाउस, कमांड सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को नुकसान पहुंचा है।
एयर डिफेंस में भी सेंध
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में ईरान ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में सफलता हासिल की। एक घटना में पुराने एफ-5 फाइटर जेट के जरिए हमले का जिक्र किया गया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा जारी नहीं किया है, और यूएस सेंट्रल कमांड भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
देश के भीतर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने सरकार से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार पूछने के बावजूद नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ रही है। वहीं पेंटागन लगातार रक्षा बजट बढ़ाने की मांग कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से करीब 200 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि की मांग की है, ताकि युद्ध से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जा सके। बताया जा रहा है कि युद्ध के पहले ही सप्ताह में अमेरिका लगभग 11 बिलियन डॉलर सैन्य अभियानों पर खर्च कर चुका है।
कुल मिलाकर, संघर्षविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं और इन हमलों ने क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है।
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