
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की ईरान (Iran) को लेकर सख्त चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने समझौता नहीं होने पर ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने तक की बात कही, जिसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) को और भी कड़े, विनाशकारी तथा अप्रत्याशित हमले की चेतावनी दी है।
ईरानी सैन्य कमान ने जारी किया संयुक्त बयान
ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने मंगलवार को संयुक्त बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि अमेरिका या इजरायल की ओर से किसी नए हमले की स्थिति में ईरान पहले से ज्यादा गंभीर और अप्रत्याशित जवाब देने के लिए तैयार है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप के UNGA संबोधन को ‘घरेलू प्रचार’ का माध्यम बताया।
ईरानी सैन्य कमान ने कहा कि अमेरिकी धमकियों से उसकी सैन्य रणनीति या ताकत के आकलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। बयान में यह भी कहा गया कि धमकियों को अमेरिका की ताकत का संकेत मानने के बजाय उसे रणनीतिक दबाव और मुश्किलों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों का भी विरोध किया। सैन्य बयान में प्रतिबंधों को तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश बताया गया और कहा गया कि इस तरह के कदम ईरान के रुख को बदलने में सफल नहीं होंगे।
ट्रंप ने UNGA में क्या कहा?
ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनके सामने एक बड़ा फैसला है—ईरान के साथ समझौता किया जाए या फिर सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। ट्रंप ने चेतावनी दी कि समझौता नहीं होने पर वह ईरान को ‘annihilate’ यानी पूरी तरह नेस्तनाबूद करने का विकल्प चुन सकते हैं।
ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश का आरोप भी दोहराया और कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अन्य देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने की अपील भी की।
धमकी के कुछ घंटे बाद तीन घंटे चली बातचीत
तनाव बढ़ाने वाले बयानों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का चैनल भी सक्रिय रहा। ट्रंप ने बताया कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब तीन घंटे बैठक की। ट्रंप ने बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ और ‘बहुत उत्पादक’ बताया।
ईरानी पक्ष की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विटकॉफ के साथ मुलाकात की। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समेत युद्ध और आर्थिक दबाव से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
यानी एक तरफ वॉशिंगटन की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी जारी है, वहीं दूसरी ओर मध्यस्थों के जरिए बातचीत का रास्ता भी खुला हुआ है। यही विरोधाभास फिलहाल अमेरिका-ईरान संबंधों की मौजूदा स्थिति को परिभाषित कर रहा है।
पेजेश्कियान के UNGA संबोधन पर नजर
ईरानी सैन्य कमान ने अपने बयान में उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरानी जनता और सशस्त्र बलों का पक्ष दुनिया के सामने रखेंगे। पेजेश्कियान इस समय UNGA में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क में हैं।
अब निगाहें पेजेश्कियान के संबोधन और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्क पर हैं। सैन्य धमकियों के बीच बातचीत जारी रहने से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच टकराव और कूटनीति, दोनों समानांतर रूप से चल रहे हैं।
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