
तेरहान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के पल में तोला, पल में माशा वाले स्वभाव से दुनिया में हर कोई वाकिफ है। वह अचानक कोई वादा करते हैं और थोड़ी ही देर में उससे पलट भी जाते हैं। ईरान ने इसे ही ध्यान में रखकर अमेरिका के साथ परोक्ष बातचीत के दौरान अनूठी तरकीब अपनाई और मनोविज्ञानियों को वार्ता का हिस्सा बनाया। दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों ने न केवल ट्रंप के व्यवहार का गंभीरता से आकलन किया बल्कि ईरानी टीम को यह सलाह भी दी कि उन्हें किस तरह के संदेश भेजे जाएं।
एक ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी वार्ता से जुड़े रहे एक ईरानी अधिकारी के हवाले से दी गई है। ड्रॉप साइट की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की द्विपक्षीय बातचीत के बाद तेहरान ने अपने सलाहकार दल में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया। इनका काम ईरानी वार्ताकारों को ट्रंप के व्यवहार का आकलन करने में मदद करना था। साथ ही, वे ऐसे संदेश तैयार कर रहे थे जिन्हें क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए ट्रंप तक पहुंचाया जा सके।
चीन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को सराहा
चीन (China) के विदेश मंत्री वांग यी (Foreign Minister Wang Yi) ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। चीनी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान यह बात कही।
होर्मुज से आवाजाही में हफ्तों लगेंगे
जापानी कंपनी मित्सुई ओएसके लाइन्स के सीईओ ने मंगलवार को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जहाज के मालिक होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही तब तक शुरू नहीं करेंगे, जब तक उन्हें यह भरोसा न हो कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता ठोस है। होर्मुज खुलने में कम से कम कुछ हफ्ते या शायद एक महीना भी लग सकता है।
अब तेल बेच सकेगा ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होते ही तेहरान को तेल और ईंधन की बिक्री शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी। ईरानी तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही प्रभावी हो जाएगी। इसके तहत तेल निर्यात को सुगम बनाने के लिए बैंकिंग, परिवहन और बीमा जैसी सेवाओं पर भी राहत दी जाएगी।एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने मंगलवार को यह भी कहा कि यह प्रदर्शन-आधारित समझौता है। इसी बीच समझौते के ढांचे में 300 अरब डॉलर के एक निजी निवेश फंड का भी प्रावधान किया गया है। रॉयटर्स को एक सूत्र ने बताया कि इस राशि में आधे से अधिक के लिए पहले ही प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। यह फंड ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा।
हमने विनाश का खतरा टाला : नेतन्याहू
इस्राइल में अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने कदमों का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को समझौते के साथ या उसके बिना भी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा, ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे, न आज और न कल। लोग मुझसे पूछते हैं कि हमने क्या हासिल किया? मेरा जवाब है कि हमने अपने ऊपर मंडरा रहे विनाश के तत्काल खतरे को टाल दिया है। हमने इस्राइल राष्ट्र को पूर्ण विनाश के खतरे से बचाया है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्हें विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों की भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका से संघर्ष खत्म करने के लिए इस्राइल को लेबनान छोड़ना होगा : ईरान
ईरान के शीर्ष राजनयिक और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को साफतौर पर कहा कि अमेरिका से युद्ध खत्म करने वाले समझौते के तहत इस्राइल को लेबनान से भी अपनी सेना हटानी ही होगी। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौते में बहुत स्पष्ट है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। हालांकि इस्राइल के लेबनान में अपनी सेना रखने के चलते समझौते की शर्तों पर असहमति से युद्धविराम पर सवाल उठ रहे हैं।
अराघची ने कहा, दक्षिणी लेबनान पर इस्राइली कब्जा जारी रहना अमेरिका-ईरान समझौते (एमओयू) का उल्लंघन माना जाएगा। वह बोले, लेबनान में युद्ध का अंत, पूरे युद्ध के अंत का एक अभिन्न अंग है। अमेरिका ने यह नहीं कहा है कि लेबनान अंतिम समझौते का हिस्सा है या नहीं। लेकिन अराघची का बयान युद्ध खत्म करने के समझौते के बारे में इस्राइली अधिकारियों के बयानों से मेल नहीं खाता है। इस्राइल इस समझौते का पक्षकार नहीं है। लेकिन उसने साफ कर दिया है कि वह लेबनान से अपनी सेना को फिलहाल वापस नहीं बुलाएगा। हालांकि ट्रंप के दबाव में नेतन्याहू के सुर कुछ नरम हुए हैं। दरअसल, इस्राइल में नेतन्याहू ईरान युद्ध को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। ऐसे में वह लेबनान में संघर्ष जारी रखकर खुद का राजनीतिक बचाव भी करने की रणनीति अपना रहे हैं।
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