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पर्यटन के नक्शे पर पिछड़ता जबलपुर, रूठे सैलानी, घटी संख्या

November 02, 2026

  • 2023 में 27 लाख तक पहुंचा पर्यटकों का आंकड़ा, अब 20 लाख के आसपास सिमटने का अनुमान

जबलपुर। प्राकृतिक सौंदर्य, नर्मदा का वैभव, संगमरमर की चट्टानों के बीच धुआंधार का आकर्षण और ऐतिहासिक विरासत—जबलपुर के पास पर्यटकों को खींचने के लिए सब कुछ है। इसके बावजूद पर्यटन के नक्शे पर शहर की रफ्तार थमती दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में करीब 27 लाख तक पहुंचा पर्यटकों का आंकड़ा इसके बाद लगातार नीचे आया। वर्ष 2024 में यह लगभग 23 लाख रहा, जबकि आगे के वर्षों के लिए भी गिरावट का अनुमान जताया गया है। यदि ये अनुमान वास्तविक आंकड़ों में बदलते हैं, तो जबलपुर का पर्यटन क्षेत्र अपनी संभावनाओं से लगातार दूर होता जाएगा।



  • सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब प्रदेश के पर्यटन केंद्रों की पहचान और पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, तब जबलपुर अपने प्राकृतिक और ऐतिहासिक आकर्षणों का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा। भेड़ाघाट और धुआंधार को छोड़ दें तो शहर के अन्य पर्यटन स्थलों को एक साथ जोड़कर ऐसा अनुभव विकसित नहीं किया गया, जिससे पर्यटक यहां एक-दो दिन अतिरिक्त रुकने के लिए प्रेरित हों। नतीजा यह है कि पर्यटक आते हैं, प्रमुख स्थल देखते हैं और लौट जाते हैं। उनके साथ होटल, परिवहन, खानपान, गाइड और स्थानीय कारोबार को मिलने वाला आर्थिक लाभ भी सीमित रह जाता है।

    प्रदेश में पर्यटन का विस्तार, जबलपुर अपनी क्षमता से पीछे
    मध्यप्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। सितंबर 2026 में प्रकाशित आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रदेश में घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या 21 करोड़ से अधिक रही। व्यापक प्रचार और नए आकर्षणों का लाभ मिला है। इसके मुकाबले जबलपुर के स्थानीय पर्यटन रुझान पर अलग से गंभीर समीक्षा की जरूरत है। शहर के पास प्राकृतिक संपदा की कमी नहीं, लेकिन उसे एक व्यवस्थित पर्यटन अनुभव में बदलने की रणनीति कमजोर दिखाई देती है।

    भेड़ाघाट-धुआंधार से आगे नहीं बढ़ पाई पर्यटन की पहचान
    जबलपुर की पर्यटन पहचान अब भी मुख्य रूप से भेड़ाघाट और धुआंधार के इर्द-गिर्द घूमती है। जबकि शहर और आसपास के क्षेत्र में बरगी बांध, नर्मदा तट, मदन महल किला, बैलेंसिंग रॉक और रानी दुर्गावती से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत जैसे कई आकर्षण मौजूद हैं। स्थानीय कला, खानपान और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर एक-दो दिन के पर्यटन पैकेज तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब पर्यटक को सभी प्रमुख स्थल एक ही दिन में दिखाकर वापस भेज दिया जाता है, तो उसके ठहरने की अवधि नहीं बढ़ती। इसका सीधा असर होटल व्यवसाय, स्थानीय परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और खानपान कारोबार पर पड़ता है। जबलपुर को केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि ठहरकर अनुभव करने वाले पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है।

    27 लाख से 20 लाख तक पहुंचने का अनुमान
    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में जबलपुर में लगभग 10 लाख पर्यटक आए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या करीब 10.3 लाख रही। वर्ष 2023 में पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आया और आंकड़ा लगभग 27 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद 2024 में यह घटकर करीब 23 लाख रह गया। प्रस्तुत ग्राफ में 2025-26 के लिए लगभग 21.6 लाख और 2026-27 के लिए करीब 20.4 लाख पर्यटकों का अनुमान दर्शाया गया है। इस तरह 2023 के उच्च स्तर की तुलना में 2026-27 के अनुमान तक पर्यटकों की संख्या में करीब एक चौथाई गिरावट की आशंका है। हालांकि, आगे के आंकड़े अनुमानित हैं, इसलिए वास्तविक गिरावट की पुष्टि आधिकारिक वार्षिक आंकड़ों से ही होगी। फिर भी यह रुझान पर्यटन प्रबंधन और प्रचार की समीक्षा की जरूरत जरूर बताता है।

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