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झूठी बीमारी से तिजोरी भरने का धंधा, नाम रखा है सुखसागर

November 02, 2026

  • सुखसागर मेडिकल कॉलेज के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी, पुराने मामले भी जांच में

जबलपुर। झूठी बीमारियों से डराकर मरीजों को ठगने वाले सुखसागर मेडिकल कॉलेज पर प्रशासन के बड़े एक्शन की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिसके तहत जांच दल यह पता लगाने में जुटा है कि दूरस्थ अंचलों से मरीज जुटाने का यह सिंडिकेट कब से सक्रिय था। उल्लेखनीय है कि सुखसागर प्रबंधन पूर्व में भी मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने और बसें भरकर लाने के ऐसे अवैध धंधों में पकड़ा जा चुका है। बार-बार घिरने के बावजूद कॉलेज के डॉक्टर व स्टाफ रसूख के दम पर पूरी तरह बेखौफ नजर आते हैं, जिन्हें किसी वैधानिक कार्रवाई की तनिक भी चिंता नहीं रहती। रविवार को गरीबों की बेबसी को भुनाकर खून-पसीने से लथपथ कमाई का यह निर्लज्ज चक्रव्यूह शहपुरा एसडीएम जमादार इरफान फरहान और तहसीलदार आरपी मार्को की संयुक्त टीम ने पिपरिया माल में छापा मारकर तोड़ा। प्रशासनिक टीम ने मौके से 19 भोले-भाले ग्रामीणों को मुक्त कराकर बस और कार जब्त की, जबकि शहपुरा पुलिस ने 6 आरोपियों पर बीएनएस की धाराओं 318(4), 61(2) और 3(5) में एफआईआर दर्ज कर बस चालक सहित 4 बिचौलियों को तत्काल हिरासत में ले लिया है।


  • गांव की चौपालों पर लाउडस्पीकर से की मुनादी
    बिचौलियों के इस गिरोह ने पिपरिया माल की तंग बस्तियों में पहले चार पहिया गाड़ी घुमाकर बाकायदा जोर-जोर से घोषणाएं करवाई थीं। प्रचार में दावा किया गया कि बड़े शहर के नामी संस्थान में सबका संपूर्ण शारीरिक परीक्षण और दवाइयां बिना किसी शुल्क के दी जाएंगी। इसी प्रलोभन में आकर आसपास के ग्रामीण जमा हो गए, जिन्हें तड़के निजी वाहन में बिठाया गया ताकि किसी को शक न हो। जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या इससे पहले भी डिंडौरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से इसी तरह मरीजों को सुखसागर अस्पताल लाया गया था। यदि ऐसा हुआ है तो उन मरीजों की भर्ती, बीमारी, उपचार, आयुष्मान कार्ड से हुए भुगतान और अस्पताल में जमा दस्तावेजों की जांच से पूरे नेटवर्क का पता चल सकता है। केवल गांव में पकड़े गए लोगों पर कार्रवाई से यह स्पष्ट नहीं होगा कि इस कथित व्यवस्था का संचालन कहां से हो रहा था।

    पुराने हादसों से सामने आया कला इतिहास
    सड़क मार्ग से दूरदराज के नागरिकों को जबरन समेटने का यह खेल कई वर्षों से चल रहा है। कुछ समय पूर्व भी बीमारों को जबलपुर की तरफ ढो रही एक बेलगाम यात्री बस रास्ते में पलट गई थी, जिसके बाद उस वाहन का सीधा संबंध इसी चिकित्सा संस्थान से पाया गया था। बार-बार बचने वाले ऐसे प्रभावशाली तंत्र के विरुद्ध प्रशासनिक जांच अब कितनी असरदार साबित होती है, इस पर पूरे जिले की निगाहें हैं।

    इन्हें बनाया गया शिकार
    अधिकारियों की जांच में खुलासा हुआ कि जबलपुर ले जाए जा रहे किसी भी ग्रामीण को कोई जटिल शारीरिक व्याधि नहीं थी। उन्हें महज हल्की मौसमी सर्दी, सूखी खांसी तथा बदन टूटने जैसी साधारण शिकायतें थीं। बिचौलियों ने इन मासूम लोगों को गंभीर रोग का डर दिखाकर निजी वार्डों में भर्ती कराने की योजना बनाई थी ताकि उनके कागजातों के आधार पर शासकीय योजनाओं से मनमाना बजट आहरित किया जा सके।

    दस्तावेज हथियाकर रकम हड़पने का षड्यंत्र
    पूछताछ में यह तथ्य पुख्ता हुआ कि संस्थान के एजेंट सामान्य पीडि़त को ले जाकर सीधे इनडोर वार्ड में दाखिल करवा देते हैं। इसके उपरांत मरीजों के पहचान पत्र, उपचार पुस्तिकाएं और जरूरी व्यक्तिगत प्रपत्र अपने अधिकार में ले लिए जाते हैं। लाचार ग्रामीण की जानकारी के बिना ही मेडिकल संस्थान उसकी सरकारी पात्रता की पूरी आर्थिक सीमा अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेता है, जिसकी अब वित्तीय पड़ताल जारी है।

    हमें किसी का डर नहीं..सब सेटिंग है
    सुखसागर मेडिकल कॉलेज का प्रशासनिक अमला और चिकित्सक वर्ग इस पूरे फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद भी पूरी तरह बेपरवाह बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों का खुलेआम कहना है कि उन्हें किसी भी स्तर पर प्रशासनिक जांच अथवा कानूनी कार्रवाई का तनिक भी भय नहीं है। उनका दावा है कि व्यवस्था के हर स्तर पर उनकी मजबूत सांठगांठ और सेटिंग पहले से तय है, जिसके चलते पूर्व में भी कई गंभीर मामलों में संस्थान का बाल भी बांका नहीं हुआ। वर्षों से लगातार पकड़े जाने के बावजूद कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न होना उनके इस दुस्साहस और रसूख को और पुख्ता करता दिख रहा है।

    मेडिकल कॉलेज के मैनेजर पर शिकंजा
    डिंडोरी की शहपुरा पुलिस ने सुखसागर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयुष्मान कार्ड के नाम पर फर्जी इलाज और शासन से धोखाधड़ी करने के मामले में अपराध क्रमांक 624/2026 दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी उमेश मिश्रा, अवधेश दुबे, विमल राय, संतोष कुमार पटेल (प्रचारक), संजय दुबे और राजा खरे (ड्राइवर) के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मामला पंजीकृत किया है। कार्रवाई के दौरान मरीजों को ले जा रहे दो वाहनों (क्रमांक एमपी 20 पीए 1209 एवं एमपी 20 एक्सई 2539) को जब्त कर लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने जबलपुर स्थित सुखसागर मेडिकल कॉलेज के मैनेजर संजय शर्मा के कहने पर काम करना स्वीकार किया है।

    पूरे सिंडिकेट की जांच होगी
    बीमारी के नाम पर सरकारी योजना से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। इस पूरे सिंडिकेट पर कार्रवाई होगी। इस तरह के पुराने मामलों की भी जांच की जाएगी
    अरुण कुमार विश्वकर्मा, कलेक्टर

    निश्चित तौर पर एक्शन होगा
    यह प्रकरण बेहद गंभीर है। सरकारी योजना की आड़ में लोगों को बीमारी का डर दिखाकर जिस तरह से सुखसागर मेडिकल कॉलेज की टीम ने ये काम किया है। हम सख्त एक्शन लेंगे।
    डॉ. नवीन कोठारी, सीएमएचओ

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