
नई दिल्ली ।भारतीय दूरसंचार क्षेत्र (Telecom Sector) में रिचार्ज प्लान(Recharge plan) को लेकर नए नियमों के बाद टेलीकॉम कंपनियों (Telecom companies)के सामने ग्राहकों के लिए अलग तरह के विकल्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू हुई है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority Of India) के टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन 2026 के तहत कंपनियों को स्टैंडअलोन वॉइस और एसएमएस वाउचर (SMS Voucher) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इन नियमों का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को विकल्प देना है जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होती या जो अलग-अलग सिम का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही कंपनियों को 28 दिनों की सामान्य वैधता के अलावा 30 दिन की वैधता वाले प्लान भी उपलब्ध कराने होंगे। नए प्रावधानों को लेकर टेलीकॉम कंपनियों ने नियामक के सामने अपनी चिंताएं और तर्क रखे हैं।
रिलायंस जियो ने सस्ते और कम अवधि वाले वॉइस प्लान को लेकर साइबर ठगी और स्पैम कॉल का मुद्दा उठाया है। कंपनी का कहना है कि कम कीमत वाले ऐसे प्लान जालसाजों और स्पैम कॉल करने वालों के लिए प्रवेश की बाधा कम कर सकते हैं। इसके चलते अनचाही व्यावसायिक कॉल और फ्रॉड में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है।
जियो ने अपने नेटवर्क की तकनीकी संरचना का भी उल्लेख किया है। कंपनी के मुताबिक उसका नेटवर्क आधुनिक 4G और 5G तकनीक पर आधारित है और केवल वॉइस कॉलिंग वाले प्लान इस व्यवस्था के अनुरूप नहीं बैठते। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसके करीब 80 प्रतिशत शुरुआती स्तर के ग्राहक डेटा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उसके अनुसार वॉइस-ओनली प्लान की मांग सीमित हो सकती है।
वोडाफोन आइडिया ने अलग तरह की चिंता सामने रखी है। कंपनी के अनुसार यदि किसी प्लान में डेटा पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो स्मार्टफोन में चलने वाली बैकग्राउंड गतिविधियों से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनी ने बताया कि स्मार्टफोन में सिस्टम अपडेट, ऐप्स का ऑटो-सिंक और नोटिफिकेशन जैसी गतिविधियां बैकग्राउंड में डेटा इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि उपयोगकर्ता के पास संबंधित डेटा सुविधा वाला प्लान नहीं है, तो पे-एज-यू-गो शुल्क शुरू हो सकता है। इससे अनजान ग्राहकों को अप्रत्याशित बिल का सामना करने की स्थिति बन सकती है।
एयरटेल ने वॉइस-ओनली प्लान को लेकर डिजिटल सेवाओं से जुड़े प्रभाव का मुद्दा उठाया है। कंपनी का तर्क है कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर काफी निर्भर है। आधार आधारित सेवाओं, यूपीआई और जनकल्याणकारी योजनाओं जैसी सुविधाओं के डिजिटल इस्तेमाल का हवाला देते हुए कंपनी ने कहा कि केवल वॉइस वाले प्लान के कारण कुछ ग्राहक इंटरनेट सेवाओं से दूर हो सकते हैं।
नए नियमों के तहत स्टैंडअलोन वॉइस और एसएमएस वाउचर का विकल्प उन उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा ऐसे ग्राहक भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं जो अतिरिक्त सिम को सक्रिय रखना चाहते हैं और अपने मुख्य नंबर पर पहले से डेटा सुविधा का उपयोग करते हैं।
30 दिन की वैधता वाले रिचार्ज से भी ग्राहकों को अलग विकल्प मिलेगा। इससे उन उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार प्लान चुनने का अवसर मिलेगा जो लंबी अवधि के बंडल्ड डेटा प्लान के बजाय केवल कॉल और एसएमएस की सुविधा चाहते हैं।
टेलीकॉम कंपनियों की ओर से रखे गए तर्कों के बीच नए नियमों के तहत कंपनियों को वॉइस और एसएमएस आधारित विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे मोबाइल रिचार्ज बाजार में ग्राहकों के लिए प्लान चुनने के तरीके में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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