अल्मोड़ा। उत्तराखंड के चौखुटिया क्षेत्र (The Chaukhutia region of Uttarakhand) की तड़ागताल झील से मिले प्राचीन जीवाश्मों (Ancient fossils) ने इस इलाके के भूगर्भीय इतिहास (Geological history) को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) के सर्वे के दौरान यहां स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिले हैं। वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, ये अवशेष करीब 100 से 150 करोड़ वर्ष पुराने हो सकते हैं।
स्ट्रोमैटोलाइट्स को शुरुआती सूक्ष्मजीवन के महत्वपूर्ण प्रमाणों में गिना जाता है। ऐसे में इनका तड़ागताल क्षेत्र में मिलना इस बात का संकेत देता है कि यहां आज से अरबों वर्ष पहले सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व रहा होगा।
तड़ागताल झील को पर्यटन और जलस्रोत के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को लेकर लगातार सर्वे किए जा रहे हैं। इसी भूगर्भीय अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को झील के आसपास स्ट्रोमैटोलाइट्स की चट्टानें मिलीं।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत कुमार गहलौत के मुताबिक, इन अवशेषों के अध्ययन से उनकी उम्र लगभग 100 से 150 करोड़ वर्ष आंकी गई है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोमैटोलाइट्स सूक्ष्मजीवों से जुड़े जीवाश्म हैं और इनका मिलना इस क्षेत्र में प्राचीन सूक्ष्मजीवन की मौजूदगी का संकेत देता है।
स्ट्रोमैटोलाइट्स को पृथ्वी पर शुरुआती जीवन के महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक प्रमाणों में माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, शुरुआती दौर में समुद्रों में साइनोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीव बड़ी संख्या में मौजूद थे। ये सूक्ष्मजीव चिपचिपी परतें बनाते थे। लंबे भूगर्भीय समय में इन परतों के जमा होने से परतदार चट्टानों जैसी संरचनाएं बन गईं, जिन्हें स्ट्रोमैटोलाइट्स कहा जाता है।
तड़ागताल में इन संरचनाओं का मिलना इसलिए अहम है क्योंकि इनकी उम्र हिमालय के निर्माण से बहुत पहले की बताई जा रही है।
भूवैज्ञानिक इतिहास के मुताबिक हिमालय का निर्माण करीब 5 से 5.5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर के बाद हुआ। इस टक्कर ने धरती की परतों में बड़े बदलाव किए और हिमालयी पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।
हिमालय के निर्माण से पहले इस क्षेत्र में टेथिस सागर मौजूद था। टेथिस सागर के बनने की प्रक्रिया लगभग 25 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुई मानी जाती है। लेकिन तड़ागताल से मिले स्ट्रोमैटोलाइट्स की अनुमानित उम्र इससे भी कहीं ज्यादा पुरानी है। यानी इन चट्टानों में दर्ज जीवन उस दौर का हो सकता है जब टेथिस सागर भी अस्तित्व में नहीं आया था।
तड़ागताल कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख और बड़ी झीलों में गिनी जाती है। मानसून के दौरान यह पानी से भर जाती है, जबकि सर्दियों में इसका पानी प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाता है। झील के तल में बने पांच प्राकृतिक छिद्रों से पानी रिसकर बाहर निकलता है। पानी निकलने के बाद स्थानीय ग्रामीण झील के तल में गेहूं की खेती भी करते हैं।
चारों ओर पहाड़ियों से घिरी तड़ागताल प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जानी जाती है। स्थानीय लोग और ताल झील समिति लंबे समय से इसे व्यवस्थित झील और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं।
तड़ागताल में मिले स्ट्रोमैटोलाइट्स सिर्फ प्राचीन जीवन की कहानी नहीं बताते, बल्कि इस इलाके के भूगर्भीय अतीत की एक नई कड़ी भी सामने रखते हैं। अगर इन अवशेषों की उम्र और भूगर्भीय संदर्भ आगे के वैज्ञानिक अध्ययनों में भी पुष्ट होते हैं, तो यह खोज हिमालयी क्षेत्र के निर्माण से पहले यहां मौजूद परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
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