लंदन। इंग्लैंड में कम बारिश (Low rainfall in England) और लगातार बढ़ते तापमान ने सूखे की स्थिति (Drought situation) को गंभीर बना दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब देश का करीब 71.3 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है। जुलाई के अंत में यह आंकड़ा करीब 50 फीसदी था, यानी कुछ ही समय में हालात तेजी से बिगड़े हैं। करीब 4.5 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां सूखे का असर देखा जा रहा है।
इस संकट के बीच पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। करीब 2.7 करोड़ लोगों के इलाकों में पानी के इस्तेमाल पर किसी न किसी तरह की पाबंदी लागू है। लगातार गर्मी के बीच बारिश की कमी ने नदियों, जलाशयों और भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
इंग्लैंड और वेल्स में जुलाई 2026 को करीब 190 वर्षों में सबसे सूखा जुलाई बताया जा रहा है। दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में स्थिति और गंभीर रही, जहां सामान्य बारिश की तुलना में महज करीब 1 फीसदी बारिश दर्ज हुई।
ब्रिटेन इस साल पांचवीं हीटवेव का भी सामना कर रहा है। बारिश की कमी और लगातार गर्म मौसम के कारण जमीन में नमी घट रही है और नदियों तथा तालाबों में पानी का स्तर नीचे जा रहा है।
सूखे का सीधा असर पानी की उपलब्धता पर पड़ रहा है। करीब 2.7 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां पानी के इस्तेमाल को सीमित किया गया है।
एक तरफ बारिश कम हुई है तो दूसरी ओर गर्मी बढ़ने से घरों, खेती और अन्य जरूरतों के लिए पानी की मांग बढ़ गई है। किसानों के सामने सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की चुनौती है।
इसी को देखते हुए सरकार किसानों के लिए सिंचाई का पानी जमा करने वाले छोटे जलाशयों के निर्माण की प्रक्रिया को आसान बनाने पर काम कर रही है।
अल-नीनो वैश्विक स्तर पर मौसम और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इंग्लैंड में मौजूदा सूखे के लिए केवल अल-नीनो को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
कम बारिश, लगातार असामान्य गर्मी और पानी की कमी ने मिलकर स्थिति को गंभीर बनाया है। ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम का रुख महत्वपूर्ण रहने वाला है।
लंबे समय तक गर्म और सूखा मौसम रहने से जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही नदियों और जलाशयों में पानी कम होने से मछलियों और दूसरे जलीय जीवों पर असर पड़ रहा है।
पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी पानी और भोजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यदि सूखे की स्थिति लंबी चली तो इसका असर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने की आशंका है।
तेज गर्मी का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक करीब 2,877 मौतें गर्मी से जुड़ी समस्याओं से संबंधित बताई गई हैं। बुजुर्गों और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को अत्यधिक गर्मी में सबसे ज्यादा जोखिम रहता है।
फिलहाल सरकार पानी की खपत नियंत्रित करने, किसानों को राहत देने और जल भंडारण बढ़ाने पर जोर दे रही है। लेकिन यदि गर्म और शुष्क मौसम आगे भी जारी रहता है तो पानी की सप्लाई, कृषि उत्पादन और पर्यावरण—तीनों पर दबाव और बढ़ सकता है।
इंग्लैंड का मौजूदा संकट यह संकेत दे रहा है कि बदलते मौसम के दौर में सिर्फ बारिश की कमी ही नहीं, बल्कि पानी के दीर्घकालिक प्रबंधन की चुनौती भी तेजी से बड़ी होती जा रही है।
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