
नई दिल्ली । बिग बॉस (Bigg Boss)फेम सिंगर(singer) परफॉर्मर और एलजीबीटीक्यूआईए प्लस समुदाय(LGBTQIA+ community) की प्रमुख आवाज सुशांत दिवगीकर (Sushant Divgikar)ने अपनी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेडिकल जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और पिछले पांच महीनों से हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी एचआरटी ले रही हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब वह अपनी नई पहचान के साथ रानी सुशांत दिवगीकर के नाम से जानी जाएंगी। उनके इस फैसले की सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है और कई लोगों ने उनकी ईमानदारी और साहस की सराहना की है।
सुशांत ने बताया कि यह फैसला उन्होंने किसी जल्दबाजी में नहीं लिया बल्कि लंबे समय तक विशेषज्ञ डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद ही इस प्रक्रिया की शुरुआत की। उनका कहना है कि जेंडर ट्रांजिशन जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और स्थायी निर्णय होता है इसलिए उन्होंने हर मेडिकल और मानसिक पहलू को समझने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया। सभी आवश्यक जांच और विशेषज्ञों की अनुमति मिलने के बाद उन्होंने हार्मोन थेरेपी शुरू की और अब तक पांच महीने का सफर पूरा कर चुकी हैं।
अपने नए नाम के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता पिता ने प्यार से उनका नाम सुशांत रखा था इसलिए वह हमेशा उनकी पहचान का हिस्सा रहेगा। वहीं रानी नाम उन्हें वर्षों से उनके चाहने वालों ने स्नेह और सम्मान के साथ दिया है। यही कारण है कि उन्होंने दोनों नामों को साथ रखते हुए आगे की जिंदगी रानी सुशांत दिवगीकर के रूप में जीने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि वह वर्ष 2023 में ही ट्रांजिशन शुरू करना चाहती थीं लेकिन उस समय फिल्म की शूटिंग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें अपना फैसला टालना पड़ा। एक फिल्म में पुरुष किरदार निभाने की आवश्यकता थी और साथ ही उनकी लिवर रिपोर्ट सामान्य नहीं थी। इसके अलावा एनीमिया और आयरन की कमी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं ने भी उन्हें कुछ समय तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया।
सुशांत का कहना है कि उनका सफर अभी पूरा नहीं हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि वर्ष 2027 तक उनका ट्रांजिशन पूरी तरह पूरा हो जाएगा। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा उपहार बताया और कहा कि अपने जन्मदिन पर खुद को इससे बेहतर कोई तोहफा नहीं दे सकती थीं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है और इसी विश्वास ने उन्हें यह साहसिक कदम उठाने की ताकत दी।
आवाज में बदलाव को लेकर भी उन्होंने कई भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरुष से महिला बनने की प्रक्रिया में केवल एस्ट्रोजन लेने से आवाज नहीं बदलती जबकि महिला से पुरुष बनने की स्थिति में टेस्टोस्टेरोन के कारण आवाज में बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी गायकी और आवाज पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अपने अनुभव साझा करते हुए सुशांत ने उन लोगों के लिए भी संदेश दिया जो जेंडर ट्रांजिशन के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा निर्णय केवल अपनी खुशी और अपनी पहचान के लिए लेना चाहिए किसी और की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए नहीं। उनका मानना है कि जिंदगी अपनी शर्तों पर जीने का नाम है और अपनी सच्ची पहचान को स्वीकार करने में कभी देर नहीं होती। उनके इस खुले और सकारात्मक संदेश को एलजीबीटीक्यूआईए प्लस समुदाय के साथ साथ समाज के कई वर्गों से भी समर्थन मिल रहा है।
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