नई दिल्ली। क्या कोई ‘लकी स्टोन’ (Consumer Forum) यानी भाग्यशाली रत्न आपकी किस्मत चमकाने की बजाय आपको बदकिस्मती के दलदल में धकेल सकता है? आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम (Visakhapatnam, Andhra Pradesh) में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने सुख-समृद्धि और सफलता की उम्मीद में 1.16 लाख रुपये का ‘लकी लॉकेट’ खरीदा था, लेकिन इसे पहनते ही उसका व्यापार डूब गया और सेहत भी खराब हो गई। मामले में विशाखापत्तनम की उपभोक्ता विवाद निवारण समिति (Consumer Forum) ने कड़ा रुख अपनाते हुए ज्वेलर को अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है और उस पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने ‘अदृष्ट ज्वेल्स गोल्ड एंड लकी डायमंड्स’ से 1.16 लाख रुपये का एक चांदी का लकी स्टोन लॉकेट खरीदा था। ज्वेलर का दावा था कि यह लॉकेट जीवन में सकारात्मकता और तरक्की लाएगा। शख्स ने ज्वेलर के बताए अनुसार दिसंबर 2023 में यह लॉकेट पहना। लेकिन फायदा होने के बजाय, वह एक महीने तक बीमार पड़ गया। उसका पूरा रियल एस्टेट का व्यापार ठप हो गया, उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और वह भयंकर मानसिक तनाव का शिकार हो गया।
हैरानी की बात यह रही कि मार्च 2024 में जैसे ही शख्स ने उस लॉकेट को उतारा, उसकी स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। इसके बाद पीड़ित ने ज्वेलर पर भ्रामक दावे करने और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए रिफंड के लिए कानूनी नोटिस भेजा। जब ज्वेलर की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
ज्वेलर की दलील: ‘पूजा-पाठ और मंत्रों से किया था सिद्ध’
ज्वेलर ने यह भी तर्क दिया कि उन्होंने ग्राहक को कड़ी मेहनत करने और सावधानी से व्यापार करने की सलाह भी दी थी। ऐसे में, ग्राहक के जीवन में होने वाली हर दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
विशाखापत्तनम कंज्यूमर फोरम की अध्यक्ष गुदला तनुजा, सदस्य कृष्ण मूर्ति और रहीमुन्निसा बेगम की पीठ ने ज्वेलर की दलीलों को खारिज कर दिया। फोरम ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ कारोबारी भोले-भाले नागरिकों की धार्मिक आस्था, रीति-रिवाजों और कमजोरियों का फायदा उठाकर अपनी जेबें भर रहे हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी ऐसे प्रोडक्ट भरे पड़े हैं जो जिंदगी, व्यापार, शादी या नौकरी बेहतर करने का दावा करते हैं।
कोर्ट ने पाया कि कंपनी के नियम और शर्तें इतने छोटे अक्षरों में लिखे थे कि उन्हें नंगी आंखों से पढ़ना नामुमकिन था, जिससे ग्राहक सही फैसला नहीं ले सका। हिंदू धार्मिक प्रथाओं (जैसे- विशेष पूजा, होम और व्रतम) के नाम पर ग्राहकों को लुभाना पूरी तरह से ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए दंडात्मक जुर्माना लगाना बेहद जरूरी है।
क्या मिला मुआवजा?
उपभोक्ता फोरम ने मामले को सही मानते हुए ज्वेलर को ये आदेश दिए:
लॉकेट की पूरी कीमत 1.16 लाख रुपये तुरंत रिफंड की जाए।
मानसिक परेशानी और नुकसान के लिए 51,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का भुगतान किया जाए।
गलत व्यापारिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ज्वेलर पर 10 लाख रुपये का दंडात्मक जुर्माना लगाया गया है।
आदेश का पालन न करने पर 9% सालाना ब्याज भी चुकाना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सीख?
यह फैसला इस बात की बड़ी नजीर है कि कोई भी कंपनी सामान बेचने के बाद अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती। भ्रामक विज्ञापनों, छुपी हुई शर्तों और झूठे वादों के खिलाफ उपभोक्ता कानून आपके साथ है। अगर आपके साथ भी खरीदारी में ऐसा कोई धोखा होता है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके मदद ले सकते हैं।
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