
वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में सभी इमिग्रेंट वीजा आवेदनों पर रोक लगा दी है। अमेरिका के विदेश विभाग के इस कदम का मकसद वीजा नियमों को सख्त करना है ताकि उन आवेदकों की पहुंच को सीमित किया जा सके, जो अमेरिका में जरूरतमंद अमेरिकियों के लिए आरक्षित पब्लिक बेनिफिट्स (सरकारी सुविधाओं) पर निर्भर हो सकते हैं।
एच-1बी वीजा, वही अमेरिकी वीजा श्रेणी है, जिसका उपयोग हर साल हजारों भारतीय पेशेवर अमेरिका में नौकरी करने के लिए करते हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सोमवार को ‘रिफॉर्मिंग द एच-वन-बी नॉनइमिग्रेंट वीजा क्लासिफिकेशन प्रोग्राम’ नामक प्रस्तावित नियम को समीक्षा के लिए व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स के पास भेजा है। इस प्रस्ताव को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इससे हर साल कम से कम 10 करोड़ डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है या यह अर्थव्यवस्था, नौकरियों, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा या किसी बड़े आर्थिक क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
फेडरल रेगुलेटरी डॉकेट के अनुसार, यह प्रस्ताव अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के तहत एक प्रस्तावित नियम के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि अभी इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। डॉकेट में यह नहीं बताया गया है कि क्या प्रशासन योग्यता के मानकों, नियोक्ता की जरूरतों, वेतन के नियमों, सालाना चयन प्रक्रिया या अनुपालन नियमों में भी बदलाव करना चाहता है। व्हाइट हाउस की समीक्षा पूरी करने के लिए अभी कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं की गई है।
यह समीक्षा अमेरिकी सरकार के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स की ओर से की जाती है, जो व्हाइट हाउस के ‘ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट’ का एक हिस्सा है। यह कार्यालय महत्वपूर्ण संघीय नियमों को प्रकाशित होने से पहले जांचता है। यह ऑफिस किसी प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है, उसे एजेंसी को वापस भेज सकता है या उसमें बदलाव के साथ मंजूरी दे सकता है। नियम की जानकारी आम तौर पर समीक्षा पूरी होने और प्रस्ताव के ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित होने के बाद जारी की जाती है।
नियमों का पूरा विवरण आमतौर पर समीक्षा पूरी होने और उन्हें फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किए जाने के बाद सामने आता है। इसके बाद आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाती हैं। टिप्पणियों की समीक्षा करने के बाद ही अंतिम नियम जारी करने पर फैसला होता है।
इसके अलावा यूएससीआईएस के एक अन्य प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है, जिसमें एच-1बी और कुछ अन्य विदेशी कर्मचारियों को नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड समाप्त करने का सुझाव है। अभी यह ग्रेस पीरियड कर्मचारियों को नई नौकरी खोजने या अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलने के लिए समय देता है।
एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है जो विशेष ज्ञान वाले कार्यों में काम करते हैं और जिनके पास आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके बराबर योग्यता होती है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में अक्सर इस प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी कांग्रेस हर साल 65,000 नए एच-1बी वीजा की सीमा तय करती है। इसके अलावा अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध होते हैं।
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