
नई दिल्ली । फ्रांस (France) की राजधानी पेरिस (Paris) में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण (Sexual Exploitation) के एक बेहद गंभीर मामले (Extremely serious matters) ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में पहली बार सार्वजनिक ट्रायल (Public Trial) की शुरुआत की गई है, जो सामान्य परिस्थितियों से अलग और बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। आमतौर पर फ्रांस में नाबालिगों से जुड़े मामलों की सुनवाई बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित बच्चों के माता पिता की मांग पर इसे सार्वजनिक किया गया है ताकि समाज में बाल सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता लाई जा सके।
यह मामला अप्रैल 2025 में सामने आया था जब कुछ छोटे बच्चों ने अपने परिजनों को बताया कि उनके साथ नर्सरी स्कूल के अंदर गलत व्यवहार हुआ है। इसके बाद जांच शुरू की गई और 36 वर्षीय स्कूल सहायक पर गंभीर आरोप लगाए गए। आरोपी की पहचान गोपनीय रखी गई है। आरोप है कि अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच उसने स्कूल के बाथरूम, लंच ब्रेक और आफ्टर स्कूल केयर के दौरान तीन से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न किया। आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
मामले में यह भी सामने आया है कि सिर्फ बच्चों ही नहीं बल्कि दो महिला सहकर्मियों के साथ भी यौन उत्पीड़न और एक के साथ यौन हमले के आरोप जुड़े हैं। यदि आरोपी दोषी पाया जाता है तो उसे दस साल तक की सजा हो सकती है। इस केस ने फ्रांस में स्कूलों और डे केयर केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे अहम बात यह है कि पीड़ित बच्चों को अदालत में पेश नहीं किया जाएगा। उनके बयान पहले ही जांच के दौरान दर्ज कर लिए गए थे जिन्हें अब न्यायाधीश अदालत में पढ़कर सुनाएंगे। इस फैसले को बच्चों की मानसिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल के महीनों में पेरिस और अन्य शहरों से ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद चिंता और बढ़ गई है। पेरिस की मुख्य अभियोजक लॉरे बेकुआ ने बताया कि राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, करीब 20 प्राथमिक स्कूल और 10 डे केयर केंद्रों से जुड़े मामलों की जांच चल रही है। यह आंकड़ा पूरे शिक्षा तंत्र में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि बच्चों की शिकायतों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया। एक मां ने पहले ही स्कूल प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। अब परिजन और संगठनों का कहना है कि यह घटना पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
माता पिता संगठन मीटू इकोले की सह संस्थापक बरका जरुआली ने अदालत के बाहर प्रदर्शन के दौरान कहा कि अब देश को जागने की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संदेश लिखे बैनर भी उठाए और सख्त कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित परिवारों की वकील रेबेका रॉयर ने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्णायक मोड़ बताया है और सरकार से स्कूलों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगॉयर ने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि 78 स्कूल कर्मचारियों को निलंबित किया गया है जिनमें कई पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने स्कूल सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए करोड़ों यूरो की योजना की घोषणा की है। यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं बल्कि फ्रांस में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा राष्ट्रीय सवाल बन चुका है।
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