
नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (By-Election) से पहले ममता बनर्जी गुट को बड़ा झटका लगा है। मालदा जिले (Malda District) के महीष बाथानी क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress)से जुड़े 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस (Congress) में शामिल हो गए। इस दल-बदल में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ पार्टी संगठन के पदाधिकारी भी शामिल हैं।
रविवार को महीष बाथानी में हुए इस घटनाक्रम में 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्लॉक उपाध्यक्ष और 100 से अधिक कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी सामने आई। इसे लेकर बलरामपुर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक बी. हलदर भी मौजूद रहे।
महीष बाथानी क्षेत्र को पहले कांग्रेस के मजबूत प्रभाव वाले इलाके के रूप में देखा जाता था। ममता बनर्जी का राजनीतिक प्रभाव बढ़ने के बाद यहां स्थिति बदल गई थी और तृणमूल कांग्रेस का आधार मजबूत हुआ था। अब बड़ी संख्या में तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने से क्षेत्र में राजनीतिक स्थिति फिर चर्चा में है।
तृणमूल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शराफत अली ने इस बदलाव की वजह भी बताई। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एक क्षेत्रीय दल के रूप में तृणमूल कांग्रेस के लिए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए वह कांग्रेस के साथ आए हैं।
यह दल-बदल ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव होने हैं और 9 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है। वहीं, रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर के नौदा सीट बरकरार रखने के बाद खाली हुई है। रेजीनगर से उनके बेटे चुनाव मैदान में हैं।
ममता बनर्जी गुट ने रेजीनगर सीट से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं नंदीग्राम में ममता गुट के पास फिलहाल कोई उम्मीदवार नहीं है, क्योंकि प्रत्याशी बनाई गईं संचिता प्रधान डे ने अपना नाम वापस ले लिया है।
उपचुनाव से पहले ममता गुट की ओर से नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर में मदद मांगने की पेशकश किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और दोनों सीटों पर समर्थन की बात कही थी।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद भी जारी है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट और दूसरे गुट के बीच विवाद के चलते तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपने जवाब, दस्तावेज और हलफनामे दाखिल करने का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा होने के कारण प्रक्रिया में समय लगता है। आयोग ने अधिक समय की जरूरत बताई थी, लेकिन अदालत ने तीन महीने में फैसला लेने को पर्याप्त माना। अदालत ने दस्तावेजों की बड़ी संख्या को देखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे तकनीकी साधनों की मदद लेने का सुझाव भी दिया।
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