नई दिल्ली। दुनिया भर में करोड़पतियों (Millionaires) के देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 1.65 लाख करोड़पति अपने मूल देश को छोड़कर (Leaving the country of origin) दूसरे देशों में बसने की तैयारी में हैं। यह संख्या अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ने वाली बताई जा रही है।
हाल ही में जारी Henley Private Wealth Migration Report 2026 में दावा किया गया है कि वैश्विक स्तर पर धनाढ्य परिवार अब केवल टैक्स बचाने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता, बेहतर जीवनशैली और निवेश की सुरक्षा जैसे कारणों से भी पलायन कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार करोड़पतियों के माइग्रेशन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
यानी पिछले एक दशक में अमीरों के अंतरराष्ट्रीय पलायन में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के सबसे अमीर लोगों के लिए अब सबसे आकर्षक गंतव्य United Arab Emirates बन चुका है। देश का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 85.3 दर्ज किया गया है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है।
कम टैक्स, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षित कारोबारी माहौल और उच्च जीवनस्तर के कारण बड़ी संख्या में निवेशक और उद्योगपति UAE का रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार United States का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 62.3 है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के संपन्न नागरिकों में दूसरी नागरिकता हासिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अमेरिका से आने वाले करीब आधे आवेदन यूरोपीय देशों के लिए हैं, जबकि लगभग एक-चौथाई आवेदन लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों में बसने के लिए किए जा रहे हैं।
अमीरों के पलायन का असर विकसित देशों पर भी दिखाई दे रहा है। United Kingdom इस समय दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है जहां से बड़ी संख्या में धनाढ्य नागरिक बाहर जा रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि ब्रिटेन से बाहर जाने वाले आवेदनों में लगभग आधी हिस्सेदारी खुद ब्रिटिश मूल के नागरिकों की है, जो बेहतर आर्थिक और कर संबंधी अवसरों की तलाश में दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट में भारत का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 56.5 बताया गया है। विश्लेषकों के मुताबिक भारतीय अमीरों के विदेश जाने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
शामिल हैं।
अब विदेशी निवास या दूसरी नागरिकता केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि संपत्ति प्रबंधन और वैश्विक कारोबारी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
धनाढ्य निवेशकों के बीच यूरोपीय देशों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। Portugal, Italy और Netherlands निवेश और निवास कार्यक्रमों के कारण प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
वहीं, Spain द्वारा गोल्डन वीजा कार्यक्रम बंद किए जाने और पुर्तगाल में नियम सख्त होने के बाद Greece को इसका सीधा फायदा मिला है। बड़ी संख्या में निवेशक अब ग्रीस में निवेश और निवास के विकल्प तलाश रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कर नीतियों में बदलाव और जीवन की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती अपेक्षाओं ने अमीरों के पलायन को नई गति दी है। आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और तेज हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश के नक्शे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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