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Mig-21 लड़ाकू विमान फिर भर सकेंगे उड़ान, केवल टेक्निकल जांच होने तक लगी रोक

नई दिल्ली: राजस्थान में 8 मई को मिग21 लड़ाकू विमान के क्रैश होने के बाद इस विमान के पूरे बेड़े पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि अब बताया जा रहा है कि ये रोक केवल तब तक है जब इनकी जाचं नहीं हो जाकी, इन विमानों की जांच होने के बाद ये एक बार फिर उड़ान भर सकेंगे. जानकारी के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने मिग 21 लड़ाकू विमानों के बेड़े की केवल जांच होने तक रोक लगाई है. एक-एक एयरक्राफ्ट की टेक्निकल जांच होने के बाद ये फिर उड़ान भर सकेंगे.

बता दें, राजस्थान के हनुमानगढ़ में मिग-21 फाइटर जेट क्रैश हो गया था. इसमें 3 महिलाओं की मौत हो गई थी. तभी से इन विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी गई थी. अब आधिकारिक तौर पर फैसला किया गया है कि मिग 21 के बेड़े में मौजूद एक-एक विमान की टेक्निकल जांच होने के बाद ये विनाम एक बार फिर उड़ान भर सकेंगे. वायुसेना ने फिलहाल 50 विमानों की उड़ान रोकी हुई है.

32 स्क्वाड्रन में से 3 मिग 21 के
जांच होने तक मिग 21 के विमानों पर लगी रोक के चलते वायुसेना का शक्ति संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है. वायुसेना के पास फाइटर जेट की 32 स्क्वाड्रन है. इनमें से 3 स्क्वाड्रन मिग 21 के हैं. इसमें एक-एक स्क्वाड्रन में 16-18 विमान हैं. ऐसे में तीनों स्काड्रन को मिलाकर वायुसेना के पास 50 मिग 21 लड़ाकू विमान मौजूद हैं.


जानकारी के मुकाबिक भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों के 42 फाइटर की ज़रूरत है. लेकिन फिलहाल इसे केवल 32 स्क्वाड्रन से काम चलाना पड़ रहा है. इसकी दो वजह बताई जा रही हैं. लगातार क्रैश हो रहे मिग 21 लड़ाकू विमान और नए फाइटर जेट की खरीद ना होना. ऐसे में लड़ाकू विमानों की कमी के चलते आज भी वायुसेना इन पुराने हो चुके मिग 21 विमानों पर निर्भर है और ये निर्भरता तब तक खत्म नहीं हो जाती जबतक कि तेजस का मार्क 1 A और मार्क 2 इसे पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर देता.

मिग 21 को स्वदेशी लड़ाकू विमानों से बदलेगी वायुसेना
भारतीय वायुसेना का प्लान मिग 21 लड़ाकू विमानों को स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों से बदलने का है. इसकी वजह है मिग 21 का खराब सेफ्टी रिकॉर्ड. बताया जा रहा है कि स्वदेशी लड़ाकू विमानों में हो रही देरी के चलते ही मिग 21 अभी भी भारतीय वायुसेना में बने हुए हैं. एयरफोर्स को अलग-अलग कैटेगरी के मिग लड़ाकू विमान 1963 के बाद से मिले हैं.

अब तक 500 मिग लड़ाकू विमान क्रैश हो चुके हैं जिनमें 200 से ज्यादा पायलट ने जान गंवाई. इसके अलावा 56 आम लोगों की मौत हुई. मिग 21 के बार-बार दुर्घटना का शिकार होने के चलते इसके विडो मेकर और उड़ता ताबूत भी कहा जाता है.

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