
सागर। ‘हनुमान अंश’ (Film ‘Hanuman Ansh’) के नाम से पहचान बनाने वाले नेत्रहीन सिंगर (Visually impaired Singer) सुनील लोधी (Sunil Lodhi) की जिंदगी में अब एक नई उम्मीद ने दस्तक दी है. उनकी आंखों के इलाज (Eye Treatments) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सुनील ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए इसकी जानकारी दी और भगवान से अपनी आंखों की रोशनी वापस मिलने की प्रार्थना की।
सुनील ने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें डॉक्टर उनकी आंखों की जांच करते नजर आ रहे हैं. इन तस्वीरों के साथ उन्होंने अपने दिल की बात लिखी और उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया, जो उनके लिए लगातार दुआएं कर रहे हैं।
‘अब बस एक कृपा और कर देना प्रभु…’
सुनील लोधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ईश्वर ने अब तक हर मुश्किल में उनका साथ दिया है और उन्हें हौसला दिया है. अब जब आंखों के इलाज की शुरुआत हो गई है, तो उनके मन में एक नई उम्मीद जगी है।
उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान उनके जीवन में भी रोशनी लौटा दें, ताकि वह इस खूबसूरत दुनिया को अपनी आंखों से देख सकें. सुनील ने यह भी लिखा कि उनके माता-पिता का वर्षों पुराना इंतजार पूरा हो और उनके अपनों की दुआएं कबूल हों।
सुनील ने अपने चाहने वालों से खास अपील की है कि वे उनके लिए दिल से प्रार्थना करें. उनके मुताबिक, लोगों का प्यार, आशीर्वाद और दुआएं ही उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं. अपनी पोस्ट के आखिर में उन्होंने भावुक अंदाज में लिखा, ‘हे प्रभु, अब बस एक कृपा और कर देना… मेरी आंखों की रोशनी वापस लौटा देना।
सुनील की इस पोस्ट ने उनके चाहने वालों को भावुक कर दिया है. हर कोई उनके जल्द स्वस्थ होने और आंखों के इलाज के सफल होने की दुआ कर रहा है. फिलहाल इलाज शुरू हुआ है, लेकिन रोशनी लौटने को लेकर अभी किसी नतीजे की जानकारी सामने नहीं आई है।
कौन हैं सुनील लोधी? गांव की चौपालों से बॉलीवुड तक पहुंचने का सफर
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) के छोटे से गांव अगरा के रहने वाले 25 वर्षीय सुनील सिंह लोधी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. सुनील जन्म से दृष्टिबाधित हैं और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उनकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी. लेकिन उन्होंने अपनी इस मुश्किल को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया. करीब 10-11 साल की उम्र से ही वह बुजुर्गों के बीच बैठकर पारंपरिक बुंदेली वाद्य यंत्र तमूरा बजाना और भजन गाना सीखने लगे थे. गांव की चौपालों, धार्मिक आयोजनों और स्थानीय कार्यक्रमों में भजन गाते-गाते उनकी आवाज लोगों तक पहुंचने लगी।
एक समय ऐसा भी था, जब वह ट्रेनों में भजन गाकर अपनी आजीविका चलाते थे. साल 2019 में सोशल मीडिया पर उनके गायन को पहचान मिली और हनुमान भजन ‘ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान’ का वीडियो वायरल हो गया. इसी आवाज ने उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचाया. नीम करौरी बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनका गाया भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ लोगों के दिलों में उतर गया. इस गाने ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर उनके आंखों के इलाज में मदद के लिए आगे आई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) भी इलाज के लिए सहायता का भरोसा दे चुके हैं. हालांकि, डॉक्टरों की विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगा कि उनकी आंखों की रोशनी लौटने की कितनी संभावना है.
सुनील की कहानी सिर्फ एक गायक की कामयाबी नहीं, बल्कि उस हुनर और हौसले की मिसाल है, जिसने मुश्किल हालात के बावजूद उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचाया।
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