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US के SIR में 2 लाख भारतीय वोटर्स के नाम कट सकते हैं, टेंशन में ट्रंप

October 09, 2026

डेस्क: अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चाहता है कि मतदाता सूची में शामिल लोगों की नागरिकता की जांच की जाए. इस प्रक्रिया के बीच करीब 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है, तो इसका असर केवल भारतीय मूल के मतदाताओं पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति पर भी पड़ सकता है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वोटर लिस्ट की जांच ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के लिए परेशानी बन सकती है? दरअसल, भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाताओं का झुकाव परंपरागत रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है. ऐसे में अगर बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटते हैं, तो कई राज्यों में चुनावी मुकाबले का गणित बदल सकता है. हालांकि, 2 लाख नाम हटने का आंकड़ा एक रिपोर्ट में जताई गई आशंका है, इसकी पुष्टि होना बाकी है.

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि वोटर लिस्ट में केवल योग्य नागरिकों के नाम होने चाहिए. इसके लिए अमेरिका में SAVE नाम के सरकारी डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह डेटाबेस सरकारी एजेंसियों को नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़ी जानकारी सत्यापित करने में मदद करता है.

अमेरिका में भारतीय मूल के कई लोग नागरिकता हासिल करने के बाद वोट डालते हैं. अगर किसी नागरिक की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो डेटाबेस उसकी नागरिकता की पुष्टि नहीं कर पाता. ऐसे में उसे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं.


  • यही इस व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ी चिंता है. कोई व्यक्ति सालों पहले अमेरिकी नागरिक बन चुका हो, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में पुरानी जानकारी होने के कारण उसे विदेशी मान लिया जाए. ऐसी गलती से उसका नाम जांच के दायरे में आ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय मूल के लोगों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है.

    अमेरिका में भारतीय मूल के मतदाता कई राज्यों में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 65% भारतीय अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया था.

    अगर जांच के कारण बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटते हैं, तो उन्हें मतदान करने में परेशानी हो सकती है. इसका असर उन राज्यों में ज्यादा दिखाई दे सकता है, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहता है.

    भारत में चुनाव आयोग SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत वोटर लिस्ट की जांच कर रहा है. इसका उद्देश्य मृत मतदाताओं, दूसरी जगह जा चुके लोगों, डुप्लिकेट नामों और अन्य अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान करना है. इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हटाए गए सभी लोग विदेशी नागरिक थे.

    अमेरिका में भारत की तरह एक केंद्रीय चुनाव आयोग नहीं है. वहां चुनावों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों की होती है. इसलिए वोटर लिस्ट की जांच और पहचान से जुड़े नियम भी अलग-अलग हो सकते हैं.

    नवंबर 2026 में अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन होने हैं. इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होंगे. इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन ट्रंप की आगे की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा.

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