
नई दिल्ली ।अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन की वजह गंभीर कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) बताई गई है। अभिनय के साथ सामाजिक कार्यों (Social work)से जुड़े नाना पाटेकर के जीवन से जुड़ा किसानों की मदद का एक किस्सा भी चर्चा में है। इस घटना में बताया गया था कि उन्होंने किसानों (Farmers) के परिवारों की स्थिति देखने के बाद करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार (Luxury Car) खरीदने का फैसला बदल दिया था।
नाना पाटेकर को हिंदी और मराठी सिनेमा के प्रमुख कलाकारों में गिना जाता था। अभिनय के अलावा वह सामाजिक कार्यों को लेकर भी सक्रिय रहे। उनके बारे में लेखक रणबीर पुष्प ने एक इंटरव्यू में कहा था कि लोगों ने उनके गुस्सैल स्वभाव को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं बना ली थीं। उन्होंने उन दावों को भी गलत बताया था, जिनमें कहा जाता था कि नाना के गुस्से के कारण फिल्म निर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ा।
रणबीर पुष्प के अनुसार, एक दिन नाना पाटेकर समाचार देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबर देखी, जिसमें एक पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ दिखाई दे रहा था। बताया गया कि नाना अगले दिन करीब 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने वाले थे और इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन खबर देखने के बाद उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को फोन किया और किसानों की मदद करने के लिए 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर बांटने को कहा।
रणबीर पुष्प ने इसी संदर्भ में नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने किसानों की मदद के लिए एनएएम फाउंडेशन की स्थापना की थी। किसानों और उनके परिवारों की परेशानियों को लेकर उनकी चिंता का यह एक उदाहरण बताया गया। उनके मुताबिक, नाना किसानों के आंसू पोंछने की कोशिश करते थे।
नाना पाटेकर के गुस्से से जुड़ा एक दूसरा किस्सा भी बताया गया था। रणबीर पुष्प के अनुसार, एक बार नाना ने किसी व्यक्ति को अपनी कार से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते देखा। उन्होंने अपनी कार रोकी और बोतल उठाई। इसके बाद उस कार को रुकवाकर उन्होंने चालक से शीशा नीचे करने को कहा। नाना ने उससे देश को साफ रखने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया और प्लास्टिक की बोतल सड़क पर फेंकने पर नाराजगी जताई थी।
नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका।
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद हिंदी और मराठी फिल्मों में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। अपने करियर में उन्होंने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खास तौर पर जाना गया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved