वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (United States and Iran) के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति (Frozen Iranian assets) को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिका चाहता है कि प्रतिबंधों में राहत के तहत जारी की जाने वाली यह राशि अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद पर खर्च की जाए, जबकि ईरान ने इस शर्त को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है।
स्विट्जरलैंड में हाल ही में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अंतरिम समझौते के बाद पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा कि दोनों पक्ष 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई राशि जारी करने के सिद्धांत पर सहमत हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस व्यवस्था को अलग तरीके से पेश किया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यह राशि सीधे ईरान के नियंत्रण में नहीं जाएगी। उनके अनुसार, फंड का उपयोग अमेरिका से गेहूं, मक्का, सोयाबीन और अन्य खाद्य उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। उनका तर्क है कि इससे ईरान की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति होगी और अमेरिकी किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि प्रतिबंधों में मिलने वाली राहत के तहत जारी राशि अमेरिका के नियंत्रण वाले खाते में रहेगी और उसका इस्तेमाल केवल खाद्य सामग्री, दवाइयों तथा अन्य मानवीय जरूरतों से जुड़े सामान की खरीद के लिए किया जाएगा।
ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि फ्रीज की गई राशि जारी होने के बाद उस पर केवल ईरान का अधिकार होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि यदि कृषि उत्पादों की खरीद की जाती है तो उसका निर्णय गुणवत्ता, कीमत और देश की जरूरतों के आधार पर होगा, न कि किसी अन्य देश की शर्तों के अनुसार।
जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने भी कहा कि अपने धन का उपयोग कैसे और कहां किया जाए, यह पूरी तरह ईरान का संप्रभु अधिकार है और किसी अन्य देश को इस पर शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रीज फंड के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच बना यह मतभेद व्यापक शांति समझौते की राह को और जटिल बना सकता है। अमेरिका में कई सांसद पहले से ही ईरान को आर्थिक राहत दिए जाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी प्रतिबंधों के जोखिम के कारण ईरान के साथ व्यापार करने से बच रही हैं।
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच व्यापार मुख्य रूप से दवाओं और मानवीय सहायता से जुड़े सामान तक सीमित है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 838 मिलियन डॉलर का रहा था। जानकारों का कहना है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो ईरान कुछ अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीद सकता है, लेकिन वह अपने आयात को केवल अमेरिका तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं होगा।
ऐसे में 12 अरब डॉलर के फ्रीज फंड के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच जारी खींचतान निकट भविष्य में समाप्त होती नहीं दिख रही है।
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