
उज्जैन। चरक अस्पताल में एमआरआई मशीन नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को निजी लैब में जांच कराने जाना पड़ रहा है। इसके अलावा यहां सोनोग्राफी और एक्स रे मशीन की संख्या भी पर्याप्त नहीं हैं।
गौरतलब है कि चरक अस्पताल उज्जैन का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां कई शहरों से रेफर हुए मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं, यहां प्रतिदिन की ओपीडी करीब एक से डेढ़ हजार मरीजों की होती है। यहां प्रतिदिन करीब 40 मरीज सीटी स्कैन और सोनोग्राफी की जांच के लिए आते हैं, जबकि दो से तीन मरीजों को एमआरआई जांच की आवश्यकता होती है। लेकिन अस्पताल में एमआरआई मशीन नहीं होने के कारण मरीज जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जाने के लिए मजबूर हैं। निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से दस हजार रुपये तक शुल्क देना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि सड़क हादसों में घायल होने के बाद ज्यादातर मरीज निजी अस्पताल में जाने के बजाय चरक अस्पताल की इमरजेंसी में ही जाते हैं। ऐसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की एमआरआई करवाना जरूरी होती हैं। एमआरआई मशीन नहीं होने के कारण घायलों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। वहीं अस्पताल में मरीजों की संख्या के हिसाब से चिकित्सकों की भी कमी है। इसके अलावा अन्य स्टॉफ भी कम है। इससे व्यवस्थाओं के संचालन में परेशानी होती है।