
नई दिल्ली। ईरान (Iran) के साथ सैन्य संघर्ष खत्म होने के बाद वैश्विक तेल बाजार (Global oil market) में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) का अनुमान है कि युद्ध समाप्त होने पर कच्चे तेल की कीमत में तेज गिरावट आ सकती है और यह 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि बाजार में सप्लाई बढ़ने से तेल सस्ता होगा, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ेगा।
बेसेंट ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान संघर्ष खत्म होने के बाद तेल बाजार में आपूर्ति काफी बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, उत्पादन बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर या 40 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष कब समाप्त होगा।
अभी 95 डॉलर के ऊपर ब्रेंट
बेसेंट का यह अनुमान ऐसे वक्त आया है, जब सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। यह जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 91 डॉलर प्रति बैरल पर था।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद बीते कुछ हफ्तों में कच्चे तेल के दाम में तेजी आई है। ऊर्जा की महंगी कीमतों ने अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ाई है, क्योंकि ईंधन और ऊर्जा लागत बढ़ने का असर दूसरी उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
तेल महंगा होने से बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी
बेसेंट के मुताबिक तेल की कीमत, महंगाई और ब्याज दरों के बीच संबंध अब साफ दिखाई दे रहा है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है और इसका असर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर भी पड़ा है।
इस सप्ताह अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। महंगाई का दबाव कम होने पर बॉन्ड यील्ड में भी गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है।
युद्ध खत्म होने का अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं
बेसेंट ने कहा कि संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतों में तेजी से नरमी आ सकती है और इसके साथ महंगाई का दबाव भी घटेगा। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि युद्ध कब समाप्त होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के तत्काल खत्म होने के अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में तेल बाजार में आगे की दिशा काफी हद तक सैन्य टकराव और ईरान से जुड़ी सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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