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उत्तराखंड के चार धामों पर हिंदुओं के साथ सिख, बौद्ध और जैन को ही एंट्री

January 28, 2026

देहरादून। उत्तराखंड के चार धामों (Char Dhams of Uttarakhand) में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर गंगोत्री मंदिर समिति (Gangotri Temple Committee) समेत बीकेटीसी की ओर से स्थिति साफ की गई है। हिंदुओं के साथ सिख, जैन और बौद्ध धर्म वालों को प्रवेश मिलेगा। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस फैसले को सही ठहराया है। कहा कि जिनकी देवी-देवताओं पर आस्था नहीं है, उनका चारधाम में क्या काम है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम कोई पिकनिक स्पॉट नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 में स्पष्ट है कि सिख, जैन, बौद्ध सनातन परंपरा के अंग हैं। अनुच्छेद 26 हमें यह अधिकार देता है कि हम अपनी धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति की रक्षा करें। यह निर्णय किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, अनुशासन और शुद्धता के संरक्षण के लिए है। उत्तराखंड में पर्यटन के लिए हजारों स्थल खुले हैं, ऐसे में धामों की पहचान बदलना आस्था के साथ अन्याय होगा। जो व्यक्ति सनातन परंपरा में आस्था रखता है, वह अपनी आस्था के अनुसार आगे बढ़ सकता है, लेकिन धाम की मूल धार्मिक पहचान से समझौता नहीं किया जा सकता।



  • गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि हिंदुओं के अलावा सिख समाज के लोग भी दर्शन को आ सकते हैं। जिन लोगों की आस्था हिंदू धर्म के प्रति है। जो हिंदू धर्म का भी मान सम्मान करते हैं, वे दर्शन कर सकते हैं।

    प्रस्ताव लाने का किया स्वागत

    गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का धार्मिक संस्थाओं ने स्वागत किया। श्री केदार सभा सहित श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत समेत सभी सनातन धर्मावलंबियों ने समर्थन किया। श्री गंगोत्री, श्री यमुनोत्री मंदिर समिति ने मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधित प्रस्ताव पारित कर दिया है।
    प्रतिबंध पुराना, अब औपचारिक ऐलान

    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि गैर हिंदुओं का मंदिरों में प्रवेश पहले से प्रतिबंधित रहा है, यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा का औपचारिक पालन है। यह किसी धर्म के विरोध का विषय नहीं है, यह प्रश्न केवल यह है कि क्या व्यक्ति इस परंपरा में आस्था रखता है या नहीं। यहां विदेशी या गैर-आस्थावान प्रवेश का कभी प्रचलन नहीं रहा। पुरोहित व्यवस्था दीक्षा-संप्रदाय पर आधारित रही है। मस्जिद में नमाज़ की शर्तें हैं, चर्च में संस्कार की सीमाएँ निर्धारित हैं। हर धर्म को अपनी पवित्रता और अनुशासन तय करने का अधिकार है। कोर्ट साफ कर चुके हैं कि मंदिर में प्रवेश कोई सामान्य नागरिक अधिकार नहीं है, बल्कि धार्मिक आचरण का विषय है।

    ‘जिनकी आस्था नहीं उनका धाम में क्या काम’
    चारधाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने सही ठहराया है। कहा कि जिनकी देवी-देवताओं पर आस्था नहीं है उनका चारधाम में क्या काम है। कहा कि भारत की सनातन संस्कृति पर दुनिया भर में हमले हों रहे हैं, ऐसे में इसे संरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने जरूरी हैं। देहरादून में मंगलवार को यूसीसी के एक साल पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री धाम सनातन आस्था के केंद्र हैं। जिनकी देवी-देवताओं पर आस्था है नहीं तो फिर उनके लिए यहां आना भी जरूरी नहीं है।

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