मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट (Eknath Shinde) के संपर्क में होने की चर्चाओं ने सियासी माहौल गरमा दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले घंटों में इस घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde भी राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं। इसी वजह से दिल्ली इस समय महाराष्ट्र की राजनीति का नया केंद्र बन गई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अलग रास्ता अपना सकते हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संभावित बागी सांसदों के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
दरअसल, हाल ही में Uddhav Thackeray ने मातोश्री में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सभी सांसदों की मौजूदगी नहीं होने से राजनीतिक अटकलों को और बल मिला। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में सांसदों की एक बैठक आयोजित की जा सकती है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सांसद अलग समूह बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो संसदीय प्रक्रियाओं और दल-बदल कानून के प्रावधानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) ने संभावित संकट को देखते हुए कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर आग्रह किया गया है कि संसद में केवल शिवसेना (यूबीटी) को अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए और किसी भी अन्य दावे पर निर्णय लेने से पहले पार्टी का पक्ष सुना जाए।
पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग किया जाएगा। इसी सिलसिले में राज्यसभा सांसद Sanjay Raut और लोकसभा सांसद Anil Desai भी दिल्ली पहुंचे हैं।
इस बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। संजय राउत ने सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि शिंदे गुट की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आ रहा है।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति की नजरें दिल्ली में होने वाली बैठकों और संभावित राजनीतिक फैसलों पर टिकी हैं। यदि चर्चाओं के अनुरूप घटनाक्रम आगे बढ़ता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक और बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।
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