
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क (New York) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) और एक पाकिस्तानी पत्रकार (Pakistani journalist) के बीच आतंकवाद (Terrorism) के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई। पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, जिसके जवाब में जयशंकर ने कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है।” इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पार्वतनेनी ने पत्रकार से कहा कि उन्हें उनका जवाब मिल चुका है।
यह सवाल उस प्रेस इंटरैक्शन के दौरान पूछा गया, जिसमें जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयेसोलो नैंती समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े नए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे थे।
पाकिस्तानी पत्रकार ने क्या पूछा?
प्रेस इंटरैक्शन के अंत में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी। सवाल के बाद जयशंकर ने उसकी ओर देखा और जवाब दिया, “A terrorist country is asking me that question. Come on.”
जयशंकर के जवाब के बाद हरिश पार्वतनेनी ने पत्रकार से कहा कि उन्होंने अपना जवाब सुन लिया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है और इसे कई मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट किया है।
समुद्री सुरक्षा पर भारत और लाइबेरिया की पहल
जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री की प्रेस बातचीत का मुख्य विषय समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा था। दोनों देशों ने UNGA के इतर ‘Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers’ की शुरुआत की है।
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी, लाल सागर और आसपास के इलाकों में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर लगातार हमले चिंता का विषय हैं। भारत ने समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर लाइबेरिया के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है। भारत बड़ी संख्या में सीफेयरर्स उपलब्ध कराने वाला देश है, जबकि लाइबेरिया दुनिया की बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है।
बोले- समुद्री कर्मचारियों पर हमले रुकने चाहिए
जयशंकर ने समुद्री मार्गों पर हिंसा और हमलों को लेकर कहा कि ऐसी हिंसा से होने वाले जान-माल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना था कि कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों पर होने वाले हमले रुकने चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारत और लाइबेरिया ने इस मुद्दे पर समान हित रखने वाले देशों और प्रमुख जहाज मालिकों को साथ लाने की कोशिश की है। इस पहल की पहली बैठक में 25 देशों के शामिल होने की बात भी सामने आई है।
समुद्री रास्तों पर बढ़े सुरक्षा जोखिम
यह पहल ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट, ओमान की खाड़ी, लाल सागर, अदन की खाड़ी, बाब-अल-मंदेब और काला सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सुरक्षा जोखिम बढ़े हैं। इन मार्गों पर संघर्ष और हमलों का असर कमर्शियल शिपिंग पर भी पड़ा है।
हाल में ओमान के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार जहाज पर मौजूद 20 भारतीय नाविकों में से 19 को बचा लिया गया था।
भारत ने नाविकों की सुरक्षा को बनाया प्रमुख मुद्दा
भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक दुनिया के अलग-अलग देशों के जहाजों पर सीफेयरर्स के रूप में काम करते हैं। ऐसे में संघर्ष प्रभावित समुद्री मार्गों पर हमलों का सीधा असर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
UNGA के दौरान हुई यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा समेत कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को वैश्विक मंचों पर उठा रहा है। जयशंकर का पाकिस्तानी पत्रकार को दिया गया जवाब इसी प्रेस इंटरैक्शन का हिस्सा था, जबकि बैठक का मुख्य एजेंडा समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा था।
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