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AAP सांसदों के भाजपा में जाने से पंजाब की सियासत में भूकंप, राजनीतिक दांव या अस्तित्व की जंग?

April 25, 2026

नई दिल्ली. भ्रष्टाचार (Corruption) विरोध आंदोलन और जनता के विश्वास से जन्मी आम आदमी पार्टी (AAP) अब अपने सबसे नाटकीय आंतरिक विद्रोह से गुजर रही है. शुक्रवार को AAP के सात राज्यसभा (Rajya Sabha) सांसदों (MP) ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) हाथ थाम लिया. राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बड़े राजनीतिक उलटफेर की घोषणा की.

चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा के 10 सांसदों में से 7 उनके साथ हैं, जिनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी के नाम शामिल हैं. इन सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए 2/3 बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए राज्यसभा के सभापति को अपनी संसदीय पहचान बीजेपी के साथ विलय करने का औपचारिक पत्र भेजा है, जिससे राज्यसभा में एनडीए की ताकत 141 से बढ़कर 148 हो गई है. वहीं, राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों पार्टी छोड़ने का ये कदम पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है.


  • दरअसल, पिछले कुछ महीनों से ऐसे संकेत मिल रहे थे कि बीजेपी पंजाब में कुछ बड़े राजनीतिक नेताओं के दल-बदल को सुविधाजनक बनाने की योजना बना रही है और पार्टी इस कदम को अंजाम देने के लिए सही मौके का इंतजार कर रही थी. और आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बीजेपी ने अलग तरह की उधेड़बुन थी, वार्ता को लेकर जगह तय हो चुकी थी. माइक्रोफोन तैयार थे. तभी राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल मुस्कुराते हुए बाहर आए.

    ‘करियर बनाने नहीं, व्यवस्था बदलने आए थे’
    बीजेपी मुख्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा और संदीप पाठक के तेवर काफी सख्त नजर आए. राघव चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि वे करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आए थे, बल्कि व्यवस्था बदलने आए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यवस्था को वे ठीक करना चाहते थे, वही उनके मूल्यों पर हावी होने लगी. इसी तरह संदीप पाठक ने कहा कि ये फैसला आसान नहीं था, लेकिन जब अपने ही घर में ईमानदार राजनीति के लिए जगह कम होने लगे तो नया मंच ढूंढना जरूरी हो जाता है, जहां आपकी आवाज मायने रखती हो.

    ‘4 और सांसद हमारे साथ’
    मौके पर मौजूद मीडिया के लिए, तीनों लोग पासा फेंक रहे थे, लेकिन तभी राघव चड्ढा ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि राज्यसभा में उस पार्टी के 10 सांसदों में से 7 अन्य सांसदों के साथ खड़े हैं, जिनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी का नाम शामिल है. उन्होंने बताया कि मंच पर बैठे तीन लोगों के अलावा इन चार लोगों ने भी पाला बदल लिया है. इसका मतलब है कि आम आदमी पार्टी के कुल दो-तिहाई सांसदों ने दल बदल लिया है. दो-तिहाई पर जोर इसलिए दिया गया है, क्योंकि इससे दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन होता है.

    2/3 का गणित
    राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, 10 में से 7 सांसदों का एक साथ जाना तकनीकी रूप से ‘विलय’ माना जाएगा, जिससे उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं होगा. राज्यसभा सचिवालय अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सहमति के बाद इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा. अधिसूचना भारत के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होते ही ये सभी सात सांसद आधिकारिक रूप से भाजपा के सदस्य माने जाएंगे. फिलहाल राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात की है, जबकि बाकी चार सांसद अगले कुछ दिनों में वरिष्ठ नेतृत्व से मिलेंगे.

    सदन में बदला शक्ति का संतुलन
    उधर, इन सात सांसदों के जुड़ने से उच्च सदन में एनडीए की स्थिति काफी मजबूत हो गई है. एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने से महज 18 सांसद दूर है. बीजेपी सूत्रों का कहना है कि ये रणनीति न केवल केंद्र में सरकार को मजबूत करने के लिए है, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के सूपड़ा साफ करने के उद्देश्य से तैयार की गई है. पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण के ठीक 24 घंटे बाद दिल्ली में हुई इस कार्रवाई ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है.

    बीजेपी की पंजाब पर नजर
    सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की नजर अब पूरी तरह से पंजाब पर है. विडंबना ये है कि जिन रणनीतिकारों ने 2022 में पंजाब में ‘आप’ की सरकार बनवाई थी, अब वही भाजपा की कमान संभाल रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा और संदीप पाठक पिछले कई महीनों से बीजेपी के संपर्क में थे. बीजेपी अब पंजाब के विभिन्न मतदाता वर्गों को लुभाने के लिए कई अन्य प्रमुख नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक संगठनों के व्यक्तियों को भी पार्टी में शामिल करने की योजना बना रही है.

    नितिन नवीन का पहला मास्टरस्ट्रोक
    बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यकाल में ये पहला बड़ा राजनीतिक विलय है. शाम 5 बजे जब वो नीली जैकेट पहनकर आत्मविश्वास के साथ बीजेपी मुख्यालय पहुंचे तो उनके चेहरे पर जीत की मुस्कान साफ झलक रही थी. दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी और अब पंजाब के सांसदों को साथ लाना उनकी आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. तस्वीरों और वीडियो में नए सदस्यों का खुले दिल से स्वागत किया गया जो भारतीय राजनीति की इस कड़वी सच्चाई को दोहराता है कि यहां कोई भी वफादारी स्थायी नहीं है.

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