
मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल (Jayant Patil) और जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy CM Eknath Shinde) से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।
दोनों शीर्ष नेताओं से हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए का हिस्सा बनने की तैयारी कर रही है। हालांकि, जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
जयंत पाटिल ने मीडिया से कहा कि उनकी मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि बैठक में शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित कार्यों और एक नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर चर्चा हुई।
वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी स्पष्ट किया कि यह मुलाकात केवल जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों के लिए थी। उन्होंने कहा कि चार दशक की राजनीति करने वाला कोई भी अनुभवी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करेगा, तो वह इस तरह खुले तौर पर सत्ता पक्ष के नेताओं से मुलाकात नहीं करेगा।
आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराना सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना था कि इस तरह के फैसलों के जरिए विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहा है, ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी प्रमुख शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस प्रशासनिक मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखने गए थे, क्योंकि इतने महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हैं।
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