नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब (Pakistan, Saudi Arabia) और तुर्किये के वरिष्ठ अधिकारियों की ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रस्तावित बैठक ने क्षेत्रीय कूटनीति को चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख के तेहरान में क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत करने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने तीनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते की भूमिका और क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
अगस्त में मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए कथित त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को कुछ हलकों में ‘इस्लामिक नाटो’ भी कहा गया था। समझौते की अवधारणा के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में अन्य देशों की प्रतिक्रिया और सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इसे नाटो के अनुच्छेद-5 के समान मानना तभी उचित होगा, जब समझौते के वास्तविक प्रावधानों और उसकी बाध्यकारी शर्तों की पुष्टि हो।
क्षेत्र में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ने की खबरों के बीच तेहरान में प्रस्तावित बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त रहा है। सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं ने क्षेत्रीय देशों के सामने कूटनीतिक संवाद की जरूरत बढ़ा दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सऊदी अरब ने मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही रोकने का दावा किया है। ऐसे माहौल में ईरान के साथ बातचीत का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और संभावित हमलों को रोकने के रास्ते तलाशना हो सकता है।
हालांकि, केवल बैठक आयोजित होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि त्रिपक्षीय रक्षा समझौता विफल हो गया है या तीनों देश ईरान के सामने किसी तरह की मजबूरी में पहुंचे हैं। इसके लिए बैठक के एजेंडे और उसके बाद सामने आने वाले फैसलों को देखना जरूरी होगा।
पाकिस्तान की सेना की ओर से जारी संक्षिप्त बयान में आसिम मुनीर की ईरान यात्रा को आधिकारिक दौरा बताया गया। हालांकि, यात्रा के विस्तृत उद्देश्य को लेकर बयान में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय स्तर पर विकसित सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयासों के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के वरिष्ठ अधिकारी तेहरान पहुंचेंगे।
बताया गया कि एक सप्ताह के भीतर मुनीर की यह दूसरी ईरान यात्रा है। इससे पहले उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई से मुलाकात की थी।
लगातार हो रही उच्चस्तरीय बैठकों से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय तनाव के बीच संवाद की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस पहल का वास्तविक प्रभाव वार्ता के नतीजों से ही स्पष्ट होगा।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग का उद्देश्य साझा सुरक्षा हितों को मजबूत करना है। लेकिन किसी भी रक्षा समझौते की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई को लेकर कितनी स्पष्ट सहमति है।
यदि किसी सदस्य देश को खतरा महसूस होता है और वह दूसरे क्षेत्रीय पक्ष के साथ बातचीत करता है, तो इसे अपने आप रक्षा समझौते की विफलता नहीं कहा जा सकता। कई बार सैन्य सहयोग के साथ कूटनीतिक संपर्क भी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा होते हैं।
इस मामले में ईरान के साथ बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा का सवाल केवल तीन देशों तक सीमित नहीं है। इसमें यमन के हूती विद्रोहियों, ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका समेत कई पक्षों के हित जुड़े हुए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देशों के सामने सुरक्षा और कूटनीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के वरिष्ठ अधिकारियों की ईरान के साथ प्रस्तावित बैठक इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखी जा रही है।
यदि बातचीत के जरिए हमलों को रोकने, सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और तनाव कम करने पर सहमति बनती है, तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, यदि प्रमुख पक्षों के बीच मतभेद बने रहते हैं, तो रक्षा समझौतों के बावजूद तनाव कम करना कठिन होगा।
फिलहाल, तेहरान में होने वाली वार्ता के परिणामों पर नजर रहेगी। यही तय करेगा कि तीनों देश अपने रक्षा सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और ईरान के साथ संवाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कोई ठोस रास्ता निकलता है या नहीं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved