जयपुर। राजस्थान के भरतपुर में नगर निकाय चुनाव (Rajasthan Municipal Body Elections) के नतीजे आने के बाद मेयर चुनाव (Mayoral Election) को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। 65 वार्ड वाले नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। भाजपा 20 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि कांग्रेस के खाते में सात सीटें आई हैं। वहीं 36 निर्दलीय पार्षदों का समूह सबसे बड़ा है। बसपा और आरएलपी को एक-एक वार्ड में जीत मिली है। ऐसे में मेयर चुनाव का गणित मुख्य रूप से निर्दलीय पार्षदों के रुख पर निर्भर करेगा।
अनुराधा सिंह को आगे करने की तैयारी
भाजपा ने मेयर पद के लिए वार्ड नंबर 61 से निर्वाचित अनुराधा सिंह को आगे करने की तैयारी शुरू कर दी है। अनुराधा सिंह पूर्व पार्षद हजारी सिंह की पत्नी हैं। पार्टी स्तर पर उन्हें मेयर पद के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने को लेकर रणनीति बनाई जा रही है।
65 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के पास फिलहाल 20 पार्षद हैं। ऐसे में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पार्टी को कम से कम 13 और पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।
कांग्रेस के सात पार्षद हैं, जबकि 36 निर्दलीय पार्षद अकेले ही बहुमत के आंकड़े से अधिक हैं। इस वजह से मेयर चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षद सबसे अहम राजनीतिक फैक्टर बन गए हैं।
निर्दलीयों पर दोनों दलों की नजर
भाजपा के सामने अब निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने सात पार्षदों के सीमित संख्या बल के बावजूद निर्दलीयों के जरिए समीकरण बनाने की कोशिश कर सकती है। स्थानीय राजनीतिक समीकरण, पार्षदों के व्यक्तिगत संबंध और अलग-अलग वार्डों की स्थिति भी अंतिम समय में भूमिका निभा सकती है।
क्रॉस वोटिंग की भी चर्चा
मेयर चुनाव से पहले भरतपुर में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, समर्थन जुटाने की कवायद के दौरान कुछ पार्षद मतदान के समय घोषित रुख से अलग फैसला कर सकते हैं। हालांकि, क्रॉस वोटिंग को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के सामने केवल संख्या जुटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने समर्थक पार्षदों को मतदान तक एकजुट रखने की भी चुनौती रहेगी।
भरतपुर के चुनाव परिणाम ने स्थानीय राजनीति में नया समीकरण बना दिया है। भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत से 13 सीट दूर है। कांग्रेस के सात पार्षदों के मुकाबले 36 निर्दलीय पार्षदों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में भाजपा की ओर से अनुराधा सिंह को मेयर पद के लिए आगे किए जाने के बाद अब नजर इस बात पर है कि पार्टी जरूरी समर्थन कैसे जुटाती है। मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षद किस खेमे के साथ जाते हैं और मतदान के दौरान क्या रुख अपनाते हैं, इससे अंतिम परिणाम तय होगा।
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