
जबलपुर। शहर में तंबाकू अब केवल एक नशा नहीं, बल्कि तेजी से फैलती सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम से सामने आए आंकड़ों ने जिले की तस्वीर को चिंताजनक बना दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 56.6 प्रतिशत पुरुष और 18.2 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं। यानी कुल मिलाकर लगभग 74.8 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों वर्गों में तंबाकू सेवन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहीं कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि तंबाकू की पहुंच किशोर आयु वर्ग तक भी हो चुकी है और 15 वर्ष की उम्र से बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
हर वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस, जागरूकता सप्ताह, स्कूल अभियान, रैलियां, पोस्टर और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को गुटखा, खैनी, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के दुष्परिणाम बताता है। इसके बावजूद जिले में तंबाकू की खपत कम होने के बजाय चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। जब तक तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता, खुलेआम बिक्री और किशोरों तक इसकी पहुंच पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक स्थिति में बड़ा सुधार मुश्किल है। पहले तंबाकू सेवन को मुख्य रूप से पुरुषों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब महिलाओं में भी इसका दायरा बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 18.2 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे चिंताजनक इसलिए मानते हैं क्योंकि इसका असर महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ सकता है।यदि वर्षों से अभियान चल रहे हैं तो फिर इतने बड़े पैमाने पर लोग तंबाकू की गिरफ्त में क्यों हैं? क्या स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री पर प्रतिबंध का पालन हो रहा है? क्या नाबालिगों को तंबाकू बेचने वालों पर नियमित कार्रवाई हो रही है? क्या सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कानून का प्रभावी पालन कराया जा रहा है?ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई से मिलेंगे।स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी तक नहीं मिल सके हैं। विशेषज्ञों ने रोकथाम के लिए निगरानी और अवैध बिक्री पर कार्रवाई की बात कही है।
15 साल की उम्र में ही शुरू हो रहा नशे का सफर
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि तंबाकू सेवन अब वयस्कों तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार 15 वर्ष की आयु के किशोर भी तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। यह संकेत है कि स्कूलों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर निगरानी पर्याप्त प्रभावी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में शुरू हुई यह आदत आगे चलकर कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक और कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनती है।
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