
सिरसा । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि दलित, पिछड़े और वंचित समाज के अधिकार (Rights of Dalit, Backward and Deprived Communities) संविधान की देन हैं (Are gift of Constitution) ।
सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़ा मामला प्रदेश की उच्च शिक्षा भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले से यह सिद्धांत स्पष्ट हुआ है कि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में स्थान बनाने योग्य है तो उसे उस अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। आरक्षण संविधान प्रदत्त सामाजिक न्याय का अधिकार है और इसे कमजोर करने का कोई प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कुमारी सैलजा ने कहा कि मामले में सामान्य श्रेणी में चयनित उम्मीदवार के 37.91 अंक थे, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के कुछ उम्मीदवार इससे अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद चयन से बाहर रहे। यह गंभीर विषय है कि योग्य युवाओं को अपनी मेहनत और मेरिट से हासिल अधिकार के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई और भर्ती प्रक्रिया में संवैधानिक प्रावधानों का सही अनुपालन सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया। सांसद ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा मेरिट के आधार पर नियुक्ति, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, पहले से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा तथा पात्र उम्मीदवारों को नियमानुसार वरिष्ठता का लाभ देने संबंधी निर्देश महत्वपूर्ण हैं। प्रदेश सरकार को फैसले की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवार को उसके संवैधानिक अधिकार और मेरिट का लाभ प्राप्त करने के लिए अदालत न जाना पड़े।
कुमारी सैलजा ने कहा कि दलित, पिछड़े और वंचित समाज के अधिकार किसी सरकार की मेहरबानी नहीं, संविधान की देन हैं। कांग्रेस सामाजिक न्याय, समान अवसर और आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नौकरियों में मेरिट का सम्मान हो, आरक्षण का पूरा लाभ मिले और किसी भी योग्य युवा के साथ अन्याय न हो। कांग्रेस संविधान और सामाजिक न्याय के अधिकारों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी।
कुमारी सैलजा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर देश की जनता का विश्वास लोकतंत्र की बुनियाद है। सांसद ने आरोप लगाया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में आयोग जिस ढंग से काम कर रहा है, उससे उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा होना चाहिए। जब चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।”
कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “इनके पीछे ताकत किसकी है? भारत सरकार की है, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की है। हम कहते हैं कि इन सबकी जवाबदेही है। आज नहीं तो कल, सबकी जवाबदेही होगी।” सांसद ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के पक्ष में अपनी आवाज उठाती रहेगी।
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